मीनोपॉज निपटने के लिए रहें तैयार

आईएएनएस, नई दिल्ली

जब कोई लड़की किशोरावस्था की ओर कदम बढ़ाती है तो वह खुद में बॉयोलोजिकल, हार्मोनल और मनोवैज्ञानिक बदलाव महसूस करती है। माहवारी और शारीरिक बदलाव होना किसी भी महिला के जीवन में महत्वपूर्ण है क्योंकि इसी प्रक्रिया से वह नए जीव को संसार में लाने में सक्षम होती है।

किसी महिला के लिए जैसे माहवारी जरूरी है, उसी तरह से उसके जीवन में मीनोपॉज भी अहम है। इससे महिला को माहवारी के दौरान के दर्द, मूड में बदलाव और सिरदर्द जैसे लक्षणों से छुटकारा मिलता है। लेकिन इसी के साथ हड्डियों से जुड़ी चुनौतियों और इसके मैनेजमेंट व रोकथाम के लिए भी जाना जाता है।

दुनियाभर में, आमतौर पर महिलाओं को मीनोपॉज 45 से 55 की उम्र में होता है, लेकिन हाल ही में ‘द इंस्टीट्यूट फॉर सोशल एंड इकनोमिक चेंज’ के सर्वे से पता चला है कि करीब 4 फीसदी महिलाओं को मीनोपॉज 29 से 34 साल की उम्र में हो जाता है, वही जीवनशैली में बदलाव के चलते 35 से 39 साल के बीच की महिलाओं का आंकड़ा 8 फीसदी है।

मीनोपॉज और हड्डी के बीच के संबंध को विस्तार से बताते हुए वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज और सफदरजंग अस्पताल के सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ ऑथोर्पेडिक्स के एसोसिएट प्रोफेसर व जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जन डॉ. जतिन तलवार कहते हैं, ‘एस्ट्रोजन हार्मोन पुरुषों व महिलाओं दोनों में पाया जाता है और यह हड्डियों को बनाने वाले ओस्टियोब्लास्ट कोशिकाओं की गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है।

मीनोपॉज के दौरान महिलाओं का एस्ट्रोजन स्तर गिर जाता है जिससे ओस्टियोब्लास्ट कोशिकाएं प्रभावित होती हैं। इससे पुरुषों की तुलना में महिलाओं की हड्डियां कमजोर होने लगती है। कम एस्ट्रोजन से शरीर में कैल्शियम सोखने की क्षमता कम हो जाती है और परिणामस्वरूप हड्डियों का घनत्व गिरने लगता है। इससे महिलाओं को ओस्टियोपोरिसस और ओस्टियोआथ्र्राइटिस (ओए) जैसी हड्डियों से जुड़ी बीमारियां होने का रिस्क बढ़ जाता है।’ अगर समय पर सेहत से जुड़ी जानकारी के प्रति जागरूक हो जाएं तो समय रहते इन बीमारियों की रोकथाम और इलाज से जुड़े फैसले लिए जा सकते हैं।

दरअसल ओस्टियोआर्थाइटिस बीमारी नहीं है बल्कि यह उम्र के साथ जोड़ों में होने वाले घिसाव से जुड़ी स्थिति है। अगर जोड़ों में घिसाव ज्यादा हो जाए तो यह किसी भी व्यक्तिकी जिंदगी को प्रभावित कर सकती है और आखिरी स्टेज पर तो जोड़ों की क्रियाशीलता भी बहुत ज्यादा प्रभावित होती है।

युवा महिलाओं को जल्द मीनोपॉज होने की वजह
आमतौर पर जल्द मीनोपॉज होने का कारण धूम्रपान, पहले से मौजूद थॉयरॉयड, कीमोथेरेपी और गंभीर पेल्विक सर्जरी हो सकती है।

इस बारे में पुष्पावती सिंघानिया रिसर्च इंस्टीट्यूट (पीएसआरआई) अस्पताल के चीफ नी व हिप रिप्लेसमेंट और अर्थेस्कोपी डॉ. गौरव पी. भारद्वाज का कहना है, ‘ज्यादातर समय घर या ऑफिस में बैठे रहने, कसरत या फिजिकल काम न करने, वजन बढ़ने और कैल्शियम की कमी, ओस्टियोआथ्र्राइटिस के रिस्क को बढ़ा देती है।

जोड़ों के आसपास दर्द, अकड़न और सूजन और कभी-कभी जोड़ों का गर्म होना, मीनोपॉज के दौरान जोड़ों के दर्द के खास लक्षण हैं। यह लक्षण सुबह के समय ज्यादा गंभीर होते हैं और फिर धीरे-धीरे कम हो जाते है।’