महिला कमांडो पत्थरबाजों से निपटेंगी

आईएएनएस, श्रीनगर

सीआरपीएफ (केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल) जम्मू एवं कश्मीर में पत्थरबाजों से निपटने के लिए इस महीने के मध्य से 800 से अधिक महिला कमांडो वाली एक विशेष इकाई शुरू करने जा रही है, क्योंकि पत्थरबाजों में महिलाओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है।

यह जानकारी केंद्रीय अर्धसैनिक बल के अधिकारियों ने दी है।

जम्मू एवं कश्मीर में सीआरपीएफ राज्य पुलिस के साथ मिलकर आंतरिक सुरक्षा संभालता है। सीआरपीएफ ने विशेष महिला इकाई शुरू करने के लिए कदम उठाए हैं, क्योंकि संकटग्रस्त क्षेत्र में महिला पत्थरबाजों की संख्या बढ़ रही है।

साढ़े तीन लाख जवानों वाले एक मजबूत बल के अधिकारियों का कहना है कि यह पहल इसलिए की गई है, क्योंकि पुरुष कमांडो महिला पत्थरबाजों के खिलाफ कार्रवाई करते हैं, तो मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के आलोचना का सामना करना पड़ता है।

महिला कमांडो को वर्तमान में सीआरपीएफ के हुमहुमा भर्ती प्रशिक्षण केंद्र में डेढ़ महीने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। बल ने उन्हें अपने पुरुष सहकर्मियों के साथ घाटी में होने वाली किसी भी पत्थरबाजी की घटना के समय तैनात करने का फैसला किया है।

अपने पुरुष समकक्षों की तरह, इस इकाई की महिला कर्मियों को भी शारीरिक रक्षा करने वाले पूर्ण पोशाक, हेलमेट, डंडे, आंसू गैस शॉटगन गोले, साथ ही पेलार्गोनिक एसिड वेनिलील एमाइड (पावा) गोले या मिर्च से भरे ग्रेनेड, प्लास्टिक बुलेट और पत्थरबाजी के दौरान भीड़ को नियंत्रित करने के लिए उपयोगी दूसरी चीजों से लैस किया जाएगा।

सीआरपीएफ के संचालन महानिरीक्षक, जुल्फिकार हसन ने आईएएनएस से कहा, "जम्मू एवं कश्मीर में सुरक्षा बलों के लिए पत्थरबाजी की घटनाएं बार-बार चुनौती बन रही हैं। यह आतंकवाद से ज्यादा चुनौतीपूर्ण है।"

उन्होंने कहा, "जैसा कि युवा आमतौर पर समूह बनाते हैं और पथराव की घटना में भाग लेते हैं, तो महिलाओं की संख्या भी पत्थरबाजी में बढ़ रही है।"

हसन ने कहा, "हम एक विशेष सीआरपीएफ महिला कमांडो इकाई शुरू करने की प्रक्रिया में हैं, जो पत्थरबाजी करने वाली महिलाओं के साथ ही पुरुषों से भी निपटेंगी। इसके लिए यहां 800 से ज्यादा महिला कर्मियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।"

महिला कर्मियों की तैनाती के सही समय के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, "हमारी महिला कमांडो अपने प्रशिक्षण के पूरा करने के कगार पर हैं। उनका इस्तेमाल 15-20 दिनों के भीतर पत्थरबाजों से निपटने में किया जाएगा।"

उन्होंने कहा, "जैसा कि हमें जनता व मानवाधिकार विभाग से महिला पत्थरबाजों के खिलाफ बल का इस्तेमाल करने पर निंदा का सामना करना पड़ता है तो हमने इससे निपटने के लिए महिला बल के इस्तेमाल का विचार तैयार किया।"

पत्थरबाजों पर हमेशा जम्मू एवं कश्मीर में आतंकविरोधी अभियान के दौरान बाधा डालने का आरोप लगाया जाता है। सुरक्षा बलों द्वारा यह देखा गया है कि हाल की घटनाओं में महिलाओं की भागीदारी इसमें बढ़ी है।

एक अन्य सीआरपीएफ अधिकारी ने कहा कि जब महिलाएं पत्थरबाजी में शामिल हो जाती हैं तो पत्थरबाजी पर नियंत्रण करना ज्यादा संवेदनशील हो जाता है।

उन्होंने कहा कि महिला कमांडो की तैनाती करने का निर्णय सीआरपीएफ के लिए बड़ा लाभकारी हो सकता है।

अधिकारी ने कहा कि इन कमांडो को कठोर प्रशिक्षण दिया गया है, जिसमें रात के समय तैनाती व खराब हथियारों को एक मिनट में सही करने का प्रशिक्षण शामिल है।