मजबूत होंगे संबंध

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चीन के चिंगदाओ में चल रहे शंघाई सहयोग संगठन या एससीओ से अलग भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनिपंग के बीच हुई बातचीत और उस दौरान संपन्न समझौते दोनों देशों के संबंधों को सामान्य धरातल पर लाने की महत्त्वपूर्ण कोशिश मानी जाएगी। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा भी कि वुहान में उनके बीच अनौपचारिक वार्ता के बाद हुई यह मुलाकात भारत-चीन मित्रता को और मजबूती देगी। वुहान में छह सप्ताह पूर्व दोनों नेताओं के बीच अनौपचारिक शिखर सम्मेलन हुआ था। वर्तमान बैठक उसके बाद का अगला कदम है।

इस दौरान हुए समझौते महत्त्वूर्ण है। इसमें पहला है भारत से गैर बासमती चावल निर्यात करने पर चीन की सहमति। भारत लंबे समय से चीन के साथ व्यापार घाटा कम करने और कृषि वस्तुओं के निर्यात के लिए दरवाजा खोलने का अनुरोध कर रहा था। ध्यान रखिए इस समय चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा 54 अरब डॉलर के आसपास है।

पिछले चार वर्षो में भारत से चीन का निर्यात 11 अरब डॉलर से 14 अरब डॉलर हुआ है, जबकि इस बीच चीन का भारत को निर्यात 32 अरब डॉलर से बढ़कर 68 अरब डॉलर हो गया है। यह नहीं कहा जा सकता कि व्यापार घाटा एकदम से पट जाएगा, किंतु उस दिशा में चीन थोड़ा आगे बढ़ा है। इसके पहले उसने भारतीय दवाइयों के आयात की अनुमति दी थी। दूसरा समझौता नदियों के जल संबंधी सूचनाओं से संबंधित है। हालांकि नये समझौते से ज्यादा विस्तृत एवं समग्र सूचना भारत को उपलब्ध हो सकता है। चीन से भारत की ओर आनेवाली निदयों का जलस्तर 15 मई से 15 अक्टूबर के बीच कितना है इसकी सूचना वह देता रहेगा। साथ ही जल की गुणवत्ता के बारे में भी। ब्रह्मपुत्र नदी का उद्गम स्थल चीन है। उसमें हर वर्ष आने वाली बाढ़ से पूर्वोत्तर के राज्य परेशान रहते है।

चीन जलस्तर बढ़ने के साथ ही हमें सूचना देना आरंभ करेगा तो हम बाढ़ आने के पहले सतर्क हो सकते हैं। तीसरी सहमति लोगों का लोगों से संपर्क बढ़ाने के लिए एक तंत्र बनाने पर हुई जिसके प्रमुख दोनों देशों के विदेश मंत्री होंगे। इसमें संपर्क बढ़ाने के लिए फिल्म, संस्कृति, योग, कला, पारंपरिक भारतीय दवाएं, संग्रहालयों का भ्रमण आदि का उल्लेख किया गया है। अभी तक चीन और भारत के लोगों के बीच जैसा अंतर्सवाद होना चाहिए नहीं हो पाया है। तो उम्मीद करनी चाहिए कि इस तंत्र की स्थापना के बाद इसमें वृद्धि होगी।