भारत में सत्तारूढ़ पार्टी से सहमति नहीं रखने वाले पत्रकारों की प्रताड़ना चिंताजनक

भाषा, वाशिंगटन

प्रेस की दशा-दिशा पर नजर रखने वाली वैश्विक संस्था रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (आरएसएफ) के मुताबिक, भारत में सत्ताधारी पार्टी के रुख से इत्तेफाक नहीं रखने वाले पत्रकारों को परेशान किए जाने के मामले चिंताजनक स्तर तक पहुंच गए हैं।

आरएसएफ ने कहा है कि भारत में आम चुनाव नजदीक आने के मद्देनजर जरूरी है कि पत्रकार अपनी जान या नौकरी पर खतरे के खौफ के बगैर खुद को अभिव्यक्त करें। रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स के एशिया-प्रशांत डेस्क के प्रमुख डेनियल बास्र्टड ने कहा, अगर ऐसा नहीं होता है तो भारतीय लोकतंत्र एक ‘मृगमरीचिका’ से ज्यादा कुछ नहीं होगा।

आरएसएफ ने कहा, भारत में खासकर पत्रकारों को इंटरनेट (सोशल मीडिया) के जरिए प्रताड़ित करने की घटनाएं परेशान करने वाली हैं। संस्था ने कहा कि पत्रकारों को प्रताड़ित किए जाने की घटनाओं के पीछे ¨हदू राष्ट्रवादियों का हाथ है।

इससे हत्या भी हो सकती है, जैसा गौरी लंकेश के मामले में हुआ। एक अखबार की संपादक गौरी लंकेश की करीब एक साल पहले बेंगलूर स्थित उनके घर में हत्या कर दी गई थी।

आरएसएफ ने अधिकारियों से अपील की है कि वे इन चरमपंथियों की धमकियों का सामना कर रहे पत्रकारों की जान और नौकरी बची होने की गारंटी मुहैया कराएं। इंटरनेट पर सक्रिय इन चरमपंथियों ने पिछले हफ्ते ट्विटर पर अपना वजूद दिखाया और खुद को ‘इंडिया अगेंस्ट बायस्ड मीडिया’ का नाम दिया।