भारत बंद: राहुल बोले, पूरा विपक्ष मिलकर BJP को हराएगा

भाषा/वार्ता, नयी दिल्ली

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों और राफेल मामले को लेकर सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला और कहा कि 2019 में विपक्षी दल मिलकर भाजपा को हराएंगे।     

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने पिछले साढ़े चार वर्षों में भारत के लोगों को आपस में लड़ाने का काम किया है।     

‘भारत बंद‘ के तहत रामलीला मैदान के निकट आयोजित विरोध प्रदर्शन में गांधी ने कहा, ‘‘2014 में नरेन्द्र मोदी ने प्रधानमंत्री बनने से पहले महिलाओं की सुरक्षा, किसानों की आय दोगुनी करने का वादा किया था। जनता ने भरोसा कर उनकी सरकार बनवायी। अब लोगों को साफ़ एहसास हो गया उन्होंने साढे चार साल में क्या किया।‘‘     

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, ‘‘मोदी जी सही कहते हैं कि जो उन्होंने साढ़ो चार साल में वो किया जो 70 साल में नहीं हुआ। अब लोगों को पता चल गया है कि उन्होंने साढे चार साल में हिंदुस्तानियों को आपस में लड़वाया। एक राज्य को दूसरे राज्य से लड़वाया। जातियों को लड़वाया।‘‘    

राहुल ने दावा किया, ‘‘महिलाओं पर अत्याचार होते रहे पर प्रधानमंत्री खामोश रहे। पूरे देश में मोदी जी पेट्रोल डीज़ल और गैस पर विपक्ष में रहते हुए खूब बोलते थे, लेकिन अब एक शब्द नहीं बोलते हैं।‘‘      

कांग्रेस नेता ने कहा कि राफ़ेल के सवाल पर प्रधानमंत्री खामोश हैं। एक मित्र उद्योगपति को 45 हज़ार करोड़ दे दिये। ये देश की आम जनता का पैसा है। नोटबंदी के नाम पर अपने मित्रों का काला धन सफ़ेद करवाया। फिर गब्बर सिंह टैक्स लगा दिया। मंझोले और छोटे उद्योगों को बर्बाद कर दिया।‘‘      

उन्होंने कहा, ‘‘आज बंद में शामिल सभी दल मिलकर मोदी को हरायेंगे। सब मिलकर भाजपा को हराने का काम करेंगे।‘‘

'लोकतंत्र बचाने के लिए एकजुट हों सभी पार्टियां'

इससे पहले पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने नरेंद्र मोदी सरकार पर वादों को पूरा करने में विफल रहने का आरोप लगाते हुए सभी विपक्षी दलों का ‘देश की एकता, अखंडता और लोकतंत्र को बचाने के लिए एकजुट होने का आह्वान किया।‘        

रामलीला मैदान में आयोजित विरोध प्रदर्शन में सिंह ने कहा, ‘‘इतनी बड़ी संख्या में विपक्षी दलों के नेताओं का शामिल होना बहुत महत्वपूर्ण कदम है। मोदी सरकार ऐसा बहुत कुछ कर चुकी है जो हद को पार कर चुका है। इस सरकार को बदलने का समय आने वाला है। आज किसान, नौजवान सहित हर तबका परेशान है।‘‘      

सिंह ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार अपने वादों को पूरा करने में विफल रही है।        

उन्होंने कहा, ‘‘अब इस बात की जरूरत है कि सभी राजनीतिक दल अपने पुराने सिलसिलों को पीछे छोड़कर एकजुट हों। भारत की जनता की पुकार सुनें। यह तभी संभव है जब हम छोटे-छोटे मुद्दों को छोड़कर आगे बढ़ेंगे। देश की एकता, अखंडता और लोकतंत्र को बचाने के लिए हमें मिलकर काम करना होगा। इसके लिए हमें तैयार होना चाहिए।‘‘     

विरोध प्रदर्शन में सिंह के अलावा संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) की प्रमुख सोनिया गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और राकांपा प्रमुख शरद पवार सहित करीब 20 विपक्षी पार्टियों के नेता शामिल हुए।      

इससे पहले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और दूसरे नेताओं ने राजघाट से रामलीला मैदान तक मार्च किया।     

कांग्रेस ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी के खिलाफ ‘भारत बंद‘ बुलाया है। पार्टी ने सभी सामाजिक संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं से ‘भारत बंद‘ का समर्थन करने का आह्वान किया है।     

कांग्रेस का कहना है कि उसकी ओर से बुलाया गया ‘भारत बंद‘ सुबह 9 बजे से दोपहर 3 बजे तक रहेगा, ताकि आम जनता को दिक्कत नहीं हो।

बिहार में हिंसा, तमिलनाडु में असर नहीं

वहीं बिहार में भारत बंद के समर्थन में कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल (राजद), हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा (हम), जन अधिकार पार्टी (जाप), समाजवादी पार्टी (सपा) और लोकतांत्रिक जनता दल (लोजद) के नेता और कार्यकर्ता सुबह से ही सड़कों पर उतर आये। बंद समर्थकों ने कई स्थानों पर सड़क और रेल यातायात अवरुद्ध करने और दुकानों को बंद कराने की कोशिश की। जाप के कार्यकर्ताओं ने राजेन्द्र नगर टर्मिनल पर पूर्व मध्य रेलवे के कर्मचारियों को हाजीपुर ले जाने वाली बस के शीशे तोड़ दिये।

पटना में बंद समर्थकों ने डाक बंगला चौराहे पर प्रदर्शन कर सड़क यातायात बाधित कर दिया और कई वाहनों के शीशे तोड़ दिये। राज्य के दानापुर, बेलीरोड और मनेर में सड़क पर टायर जलाकर यातायात में बाधा डाली गयी। गया, जहानाबाद, दरभंगा, कटिहार, समस्तीपुर, अररिया, किशनगंज तथा अन्य जिलों में बंद का व्यापक असर देखा जा रहा है।

तमिलनाडु में बंद का आम जनजीवन बेअसर दिखायी दिया। बंद के दौरान दुकानें और व्यावसायिक संस्थान खुले रहे। बसें और अन्य सार्वजनिक यातायात सामान्य रहा, हालांकि केरल और कर्नाटक जैसे पड़ोसी राज्यों के बीच चलने वाली अंतर-राज्यीय बसें ऐहतियात के तौर पर तमिलनाडु सीमा तक ही चलायी गयी।

स्कूल-कॉलेज और शैक्षणिक संस्थान खुले रहे और सभी सरकारी कार्यालयों, बैंकों और अन्य वाणिज्यिक संस्थानों में प्रतिदिन की तरह कामकाज हुआ। चिकित्सा, बिजली, दूध और अन्य सेवायें जारी रही। राज्य में कई स्थानों पर छिटपुट घटनाओं की रिपोर्ट मिली है।