बेदाग खबरों की चिंता

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की इस अपील को गंभीरता से लेना चाहिए कि सोशल मीडिया पर गंदगी न फैलाई जाए। गंदगी से अर्थ है झूठ व अफवाह फैलाने, नकारात्मक खबरों व विचारों को महत्त्व देने और आपसी बहस में अभद्र शब्दों का धड़ल्ले से प्रयोग। सोशल मीडिया का सदुपयोग हो तो उससे समाज को कई मामलों में सही दिशा मिल सकती है, सकारात्मक चेतना का विकास हो सकता है, राजनीतिक-सामाजिक-सांस्कृतिक सभी मामलों में स्वस्थ बहस और सही जानकारी का वातावरण बन सकता है। देखा जा रहा है कि सोशल मीडिया झूठ और अफवाह फैलाने का सबसे बड़ा माध्यम बन रहा है।

प्रधानमंत्री ने ठीक ही कहा है कि कई लोग जो देखते, सुनते हैं, उसी दिशा में आगे बढ़ जाते हैं और यह नहीं सोचते कि इसका समाज पर क्या असर होगा? हमने सामूहिक हिंसा की कई दर्दनाक घटनाएं देखीं, जिनके पीछे केवल सोशल मीडिया द्वारा फैलाया गया अफवाह ही एकमात्र कारण था। हर तकनीक और उससे विकसित माध्यमों का सदुपयोग एवं दुरु पयोग दोनों होता है।

यह हम पर निर्भर है कि हम उसका कैसा उपयोग करना चाहते हैं। हालांकि सोशल मीडिया बहुत कुछ अच्छा करने का माध्यम भी बना है। उसको ताकत देने की आवश्यकता है। प्रधानमंत्री कह रहे हैं कि सकारात्मक खबरों को शेयर करिए, ऐसी खबरों को फैलाइए, जिससे देश में आशा का माहौल बने। यह सोशल मीडिया के साथ मुख्यधारा की मीडिया पर भी लागू होता है।

मुख्यधारा की मीडिया जिन खबरों और विचारों पर चर्चा करती है; सोशल मीडिया पर लोग अपने अनुसार उन पर विचार व्यक्त करने लगते हैं। सोशल मीडिया पर गंदगी फैलने के अन्य कई कारण हैं। सबसे बड़ा कारण राजनीतिक है। ज्यादातर दलों और नेताओं ने नरेन्द्र मोदी, भाजपा और आरएसएस की निंदा में सीमाओं का अतिक्रमण किया। ये मान्य राजनीतिक आलोचना तक सीमित नहीं रहे।

इससे उनके समर्थक आक्रामक हुए और यह बढ़कर एक-दूसरे पर लांछन-प्रतिलांछन और गाली-गलौज तक पहुंच गया है। मोदी विरोधी उनके समर्थकों को भक्त कहकर चिढ़ाते हैं और प्रतिक्रिया में जिसके पास गुस्सा निकालने के लिए जैसे शब्द हैं, उनका प्रयोग करने लगते हैं।

मोदी का कहना सही है कि कई लोग ऐसे शब्दों का प्रयोग करते हैं, जो किसी सभ्य समाज में स्वीकार नहीं की जा सकती है। यह बंद होना चाहिए। इसलिए जरूरी है कि दोनों पक्षों के दल लगातार अपने समर्थकों को इस तरह की गाली-गलौज से बचने की सलाह देते रहें।