बिहार सरकार का किसानों को तोहफा- फसलों के उत्पादन में क्षति होने पर मिलेगी वित्तीय सहायता

सहारा न्यूज ब्यूरो, पटना

बिहार सरकार ने किसानों को बड़ी सौगात देते हुये उन्हें फसलों के उत्पादन में क्षति होने पर वित्तीय सहायता देने के उद्देश्य से मंगलवार को बिहार राज्य फसल सहायता योजना लागू करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी।

मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के प्रधान सचिव अरुण कुमार सिंह ने यहां बताया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद् की बैठक में राज्य के रैयती एवं गैर रैयती किसानों के हित में समावेशी फसल सहायता योजना लागू करने का बड़ा फैसला किया गया है।

सहकारिता विभाग के प्रधान सचिव अतुल प्रसाद ने बताया कि पूर्व में फसल बीमा योजना के तहत प्रीमियम राशि में केन्द्र को 49 प्रतिशत, राज्य को 49 प्रतिशत तथा लाभुक किसान को दो प्रतिशत हिस्सा देना पड़ता था। वास्तव में उससे सिर्फ ऋणी किसानों को थोड़ा बहुत फायदा हो पाता था। उन्होंने खरीफ-2016 के आंकड़े के हवाले से बताया कि पूर्व की फसल बीमा योजना के तहत राज्य की प्रीमियम राशि 495 करोड़ रुपये थी जबकि राहत राशि मात्र 221 करोड़ रुपये रही।

इसलिए बिहार सरकार द्वारा राज्य के सभी श्रेणी के किसानों के हित में एक नई समावेशी योजना के रूप में फसलों के उत्पादन में हुए हुई क्षति की स्थिति में किसानों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने के लिए प्रदेश में खरीफ-2018 मौसम से बिहार राज्य फसल सहायता योजना लागू करन की स्वीकृति दी गई है।

प्रसाद ने बताया कि इस योजना के तहत अधिसूचित फसल के लिए निर्धारित थ्रेसहोल्ड उपज दर के आधार पर किसानों को सहायता राशि दी जायेगी। वहीं, सहकारिता विभाग के पूर्व प्रधान सचिव अमृत लाल मीणा ने बताया कि इस अनूठी योजना की चार प्रमुख बातें उल्लेखनीय हैं। इसके लिए किसानों को कोई प्रीमियम राशि या निबंधन शुल्क का भुगतान नहीं करना होगा। उन्होंने बताया कि किसान किसी भी वसुधा केन्द्र, इंटरनेट कैफे या घर से ऑनलाइन निबंधन करा सकते हैं तथा योजना के तहत रैयती तथा गैररैयती दोनों तरह के किसान आच्छादित हैं।

मीणा ने बताया कि रैयती किसानों को भू स्वामित्व प्रमाण पत्र देना होगा। इसके अलावा आवासीय साक्ष्य, फोटो पहचान पत्र, आधार कार्ड, बैंक पासबुक के कागजात जरूरी होंगे। किसानों को सहायता राशि फसल कटनी के आधार पर खरीफ के लिए मार्च-अप्रैल तथा रबी के लिए सितम्बर के अंत तक भुगतान कर दिया जायेगा और यह भुगतान उनके आधार इनबिल्ड बैंक खातों में ऑनलाइन होगा।

उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष धान अधिप्राप्ति में छह लाख से अधिक किसानों ने निबंधन कराया था। यदि थ्रेसहोल्ड उपज दर के सापेक्ष वास्तविक उपज दर में 20 प्रतिशत तक की कमी होती है तो 7500 रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से अधिकतम दो हेक्टेयर के लिए कुल 15000 रुपये तथा 20 प्रतिशत से ज्यादा कमी पाये जाने पर 10000 प्रति हेक्टेयर की दर से अधिकतम दो हेक्टेयर के लिए कुल 20000 रुपये सहायता राशि अनुमान्य होगी। उन्होंने बताया कि इस योजना का लाभ राज्य सरकार की कृषि इनपुट योजना तथा डीजल अनुदान योजना के तहत लाभार्थी किसानों को भी अनुमान्य होगा।