बहुत हुआ दुराचार

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सर्वोच्च न्यायालय द्वारा देश में बलात्कार की बढ़ती घटनाओं पर गंभीर चिंता व्यक्त करना वास्तव में आम नागरिकों की भावनाओं की ही अभिव्यक्ति है। हाल में कुछ बालिका आश्रय गृहों में जिस तरह बालिकाओं से यौन व्यापार कराने के प्रमाण आ रहे हैं, उनसे पूरा देश व्यथित है। बालिका गृहों के कारनामे सामने आने से पहले भी बार-बार बलात्कारों की खबरें आ रही थीं। इसमें सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणी को अतिवाद नहीं कहा जा सकता कि जिधर देखो उधर ही महिलाओं का बलात्कार हो रहा है।

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो का आंकड़ा बताता है कि देश में हर छह घंटे में एक महिला बलात्कार की शिकार हो रही है। 2016 में में 38 हजार 947 महिलाओं के साथ बलात्कार हुआ। निश्चय ही यह गंभीर चिंता का विषय है। महिलाओं-बच्चियों के विरु द्ध यौन अपराध रोकने तथा कड़ा कानून बनाए जाने के बावजूद ऐसा होना साबित करता है कि इस दिशा में अभी काफी कुछ किए जाने की आवश्यकता है। चूंकि मामला मुजफ्फरपुर आश्रय गृह में बच्चियों से हुए बलात्कार से संबंधित था, इसलिए न्यायालय का उसके बारे में टिप्पणी करना स्वाभाविक था।

न्यायालय ने बिहार सरकार से पूछा कि आश्रय गृह का संचालन करने वाले एनजीओ को बिना किसी जांच-पड़ताल के भारी रकम सरकार कैसे दे रही थी? बात सही है। हालांकि देवरिया के मामले में तो यह सामने आ रहा है उसकी मान्यता तक रद्द कर दी गई थी, लेकिन वह चलता रहा। पुलिस उसके यहां लड़कियां भेजती रही। इसके मायने हैं कि ऊपर से नीचे तक भ्रष्टाचार तो फैला ही हुआ है, सरकारी विभागों के बीच आपसी तालमेल का भी अभाव है। मान्यता रद्द किए जाने की सूचना पुलिस प्रशासन को दी गई या नहीं?

अगर सूचना दी गई होती तो पुलिस दूसरी मान्यताप्राप्त आश्रय गृह में बालिकाओं को भेजती। सर्वोच्च न्यायालय ने सभी राज्यों से आश्रय गृहों में यौन दुराचार रोकने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी है। हो सकता है उसके बाद और आदेश भी जारी करे। न्यायालय ने जो दिशा-निर्देश दिया है, उसे  इंसानियत के नाते ठीक कहा जा सकता है।

मीडिया पर यौन उत्पीड़न की घटनाओं की पीड़ितों की तस्वीरें किसी भी रूप में प्रकाशित या प्रसारित करने तथा उनका साक्षात्कार लेने पर प्रतिबंध लगा दिया है। हालांकि मीडिया का बड़ा वर्ग इन मामलों में चेहरा न दिखाने, नाम न बताने आदि की सतर्कता बरतता है, फिर भी न्यायालय का जो निर्देश है, उसे स्वीकार करने में हर्ज नहीं है।