बसपा को बदनाम करने का चल रहा कुप्रयास : मायावती

आईएएनएस/आईपीएन, लखनऊ

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने भाजपा और मीडिया पर निशाना साधते हुए कहा कि एससी-एसटी एक्ट के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की तुलना बसपा सरकार के 20 मई एवं 29 अक्टूबर, 2007 के दिशा-निर्देशों से करना पूरी तरह से 'असत्य एवं भ्रामक' है। (22:11)

उन्होंने सीधे भाजपा और मीडिया पर आरोप लगाते हुए कहा, "यह सब बहुजन समाज पार्टी को बदनाम करने के लिए इनका कुप्रयास है। सुप्रीम कोर्ट ने 20 मार्च, 2018 के अपने आदेश में अग्रिम जमानत के विषय में जो आदेश दिए हैं, उसका हमारी सरकार के दिशा-निर्देशों में कहीं उल्लेख नहीं है।

मायावती ने गुरुवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि उन्होंने अपनी सरकार में 20 मई 2007 को जो दिशा-निर्देश दिए थे, उन निर्देशों का गलत तरीके से 'इस्तेमाल व दुरुपयोग' किया जा रहा था।

उन्होंने बताया कि एससी/एसटी के मामले दर्ज होने में काफी दिक्कतें की जा रही थीं, जिसे गंभीरता से लेते हुए इस आदेश को उन्होंने तत्काल प्रभाव से खत्म कर दिया और इसके स्थान पर एक नया शासकीय आदेश 29 अक्टूबर, 2007 को जारी कर दिया गया। इस बात को भाजपा समर्थक मीडिया व भाजपा के लोग दबाए हुए हैं।

मायावती ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश एवं बसपा के दिशा-निर्देशों में कोई समानता नहीं है। भाजपा आम जनता में बसपा की छवि खराब करना चाहती है, इसलिए भ्रम फैा रही है।

उन्होंने कहा कि भाजपा उत्तर प्रदेश के लोकसभा उपचुनाव में हुई अपनी हार को अभी तक भी नहीं पचा पा रही है और उन्हें यह आभास हो गया है कि प्रदेश की तरह ही अब पूरे देश में भाजपा के खिलाफ माहौल तैयार हो गया है। भाजपा बोलती कुछ है, करती कुछ और है। जनता भाजपा की समाज विरोधी गतिविधियों से त्रस्त हो गई है। 'सबका साथ सबका विकास' का नारा जुमला बनकर रह गया है।