बच्चों की दांत की समस्या से अनजान है मां-बाप

ज्ञान प्रकाश, सहारा न्यूज ब्यूरो

आप को जानकर यह हैरत होगर कि मां की कोख से जन्म लेने के दो तीन साल के दरम्यिान ही आपके बच्चे के दातों में कीड़े लगना, पायरिया, कैविटी जैसी बीमारियां शुरू हो जाती हैं।

इस सर्वेक्षण के तहत पिछले दो महीनों में विभाग में आए 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों के माता-पिता का प्रश्नावली के माध्यम से साक्षात्कार लिया गया था। 14 वर्ष से कम उम्र के 1000 बच्चों एवं उनके माता-पिता से मुलाकात कर तैयार किया गया है यह सर्वेक्षण।

एर्क्‍सपट्स के अनुसार : सर्वेक्षण के प्रमुख एवं मेड्स के पेडोडोंटिक्स एंड प्रीवेंटिव डेंटिस्ट्री यूनिट के एसोसिएट प्रोफेसर एवं साउथ एशियन एसोसिएशन ऑफ पेडियाट्रिक डेंटिस्ट्री (एसएएपीडी) के आर्गनाइजिंग सेक्रेटरी डा. ज्ञानेंद्र कुमार ने कहा कि इस प्रवृत्ति के कारण उनके बच्चे में मुंह की बीमारी का खतरा बढ़ जाता है।

हम दांत की समस्याओं को रोकने के लिए माता-पिता को हर छह महीने में अपने बच्चे को दंत चिकित्सक से दिखाने की सलाह देते हैं क्योंकि दांत की समस्या के बारे में जानकारी नहीं होने पर यह सामान्य स्वास्थ्य को भी प्रभावित करती है।

सर्वेक्षण में माता-पिता से उनके बच्चों की खराब आदतों के बारे में पूछा और आंकड़े एकत्र किए गए। इससे पता चला कि 40 प्रतिशत से अधिक बच्चे अंगूठा चूसने की आदत के कारण मालओक्लुजन (दो दांतों के बीच गलत अलाइनमेंट या दांतों की गलत स्थिति जिसमें जबड़े के बंद होने पर दांत एक दूसरे से रगड़ खाते हैं) से पीड़ित थे।

सर्वेक्षण की खास बातें

  • 38 प्रतिशत बच्चों में नाक की बजाय मुंह से सांस लेने की आदत थी जिससे उनमें मसूढ़े के रोग और दांत के मालओक्लुजन होने का खतरा था।
  •  सर्वेक्षण में पाया गया कि 90 प्रतिशत माता-पिता को बाल दंत चिकित्सा की विशेषता के बारे में जानकारी नहीं थी।

मुख्य निष्कर्ष

  • 60 प्रतिशत से अधिक माता-पिता ने बताया कि उनके बच्चे दिन में सिर्फ  एक बार ब्रश करते हैं जबकि दंत चिकित्सक ने उन्हें दो बार ब्रश करने की सलाह दी थी। दिन में एक बार ब्रश करने से दंत क्षय हो सकता है और हमेशा बच्चों को दिन में दो बार ठीक से ब्रश करने की सलाह दी जाती है।
  • 85 प्रतिशत माता-पिता इस बात से अनजान थे कि बच्चों के लिए विभिन्न प्रकार के टूथपेस्ट उपलब्ध हैं और वे अपने बच्चों को वही पेस्ट देते थे जिसका इस्तेमाल वे खुद करते थे लेकिन बच्चों के लिए बहुत नरम ब्रिसल वाले ब्रश का इस्तेमाल करना चाहिए। बच्चों के टूथपेस्ट में फ्लोराइड होना चाहिए क्योंकि यह दंत क्षय होने से रोकता है जो आजकल बच्चों में बहुत आम है।
  • हालांकि दांत की बीमारियों को आसानी से रोका जा सकता है, लेकिन सर्वेक्षण में पाया गया कि ज्यादातर माता-पिता हर 6 महीने में दंत चिकित्सक के पास नहीं जाते थे।
  • लगभग 82 प्रतिशत माता- पिता ने बताया कि वे केवल दंत समस्या होने पर ही दंत चिकित्सा जांच के लिए दंत चिकित्सक के पास गए थे।