फीफा कप : एक माह छाई रहेगी खुमारी

मनोज चतुर्वेदी,

रूस फीफा विश्व कप के लिए पूरी तरह से तैयार है। दुनियाभर की 32 टीमें जब खिताब के लिए जूझेंगी तो लगभग एक माह तक सारी दुनिया  फुटबॉलमय  हो जाएगी। सही है कि 32 टीमों में से नॉकआउट चरण में स्थान बनाने वाली 16 टीमों में जबर्दस्त संघर्ष होगा। लेकिन हम जब खिताब जीतने वाली टीमों की बात करते हैं तो सिमटकर ब्राजील, अर्जेंटीना, पुर्तगाल, जर्मनी, फ्रांस, स्पेन और इंग्लैंड तक ही रह जाते हैं। खिताब की दावेदार दो तरह की टीमें हैं।
एक तरफ ब्राजील, अर्जेंटीना और पुर्तगाल हैं। तीनों टीमें अपने एक-एक सुपरस्टार पर निर्भर करती हैं। वहीं, इस बार फ्रांस, जर्मनी और स्पेन युवा खिलाड़ियों की टीम है। जर्मनी तो किसी स्टार के सहारे कभी नहीं खेली है, उसका हमेशा एक तालमेल वाली टीम में विश्वास रहा है। स्पेन और फ्रांस भी इस बार युवाओं को लेकर दावेदारी पेश कर रही हैं। लियोनेल मेसी पर अर्जेंटीना, नेमार पर ब्राजील और क्रिस्टियानो रोनाल्डो पर पुर्तगाल की विजेता बनने की सारी संभावनाएं टिकी हुई हैं। आम तौर पर फुटबॉल जगत में मेसी और रोनाल्डो को लेकर चर्चा चलती रहती है कि दोनों में महानतम कौन है। किसने ज्यादा बेलोन डियोर अवार्ड जीते हैं, और किसने ज्यादा गोल जमाए हैं। इस श्रेणी में ही ब्राजील के नेमार को भी रख लिया जाता है। अभी कुछ समय पहले तक नेमार के पूरी तरह फिट नहीं होने पर ब्राजील के कोच और टीम दोनों ही चिंतित थे। लेकिन कुछ दिनों पहले जब नेमार ने ऑस्ट्रिया के खिलाफ खेलकर फिटनेस साबित कर दी तो सभी में जान आ गई। तीनों खिलाड़ियों में एक समानता और है कि वे फुटबॉल जगत की तमाम उपलब्धियों को पाने के बाद भी अपनी टीमों को विश्व चैंपियन नहीं बना सके हैं। मेसी और रोनाल्डो की बात करें तो माना जाता है कि वे अपने नाम विश्व कप को कर लें तो उनका नाम पेले और माराडोना से भी ऊपर लिया जा सकता है। ऐसा भी नहीं है कि दोनों इसके लिए प्रयास नहीं करते पर विश्व कप में खेलते समय उनके ऊपर दबाव हावी हो जाता है। यही वजह है कि मेसी ने तीन विश्व कप में पांच और रोनाल्डो ने इतने ही विश्व कप में तीन ही गोल जमाए हैं।
दिलचस्प बात यह है कि इन दोनों ने क्लब फुटबॉल में बार्सिलोना क्लब और रियाल मैड्रिड के लिए 1000 से ज्यादा गोल जमाए हैं। इससे यह तो साफ है कि मेसी और रोनाल्डो जब भी विश्व कप में खेलने उतरते हैं तो इसे जीतने का दबाव  उन पर हावी हो जाता है, और सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन नहीं करने देता। इन दोनों में देश के लिए प्रमुख चैंपियनशिपों को जीतने का उतावलापन हमेशा दिखता है। 2016 के यूरो कप के फाइनल को ही याद करें। इसमें आठवें मिनट में फ्रांस के दिमित्री पायेट ने रोनाल्डो को टैकिल करने के दौरान उनका बांया घुटना चोटिल कर दिया। वह जब मैदान से बाहर जा रहे थे तो उनकी आंखों से टपकते आंसू उनके उतावलेपन का बयां कर रहे थे। उनका सौभाग्य था कि उनकी टीम चैंपियन बन गई। इस खिताब जीत की वजह से ही उसे इस विश्व कप में भी खिताब का दावेदार माना जा रहा है। इसी तरह की हताशा अर्जेंटीना के चार साल पहले मरकाना स्टेडियम में जर्मनी के हाथों हार जाने पर मेसी के चेहरे पर देखी गई थी। स्पेन, जर्मनी, फ्रांस और इंग्लैंड की टीमें युवा खिलाड़ियों की प्रमुखता वाली हैं। स्पेन 2010 में चैंपियन रहने के बाद 2014 में ग्रुप चरण में ही बाहर होने की निराशा से पार पाने का प्रयास करेगी। जर्मनी ने अजेय रहकर अपना क्वालिफाइंग अभियान चलाया है, इससे उनकी ताकत को समझा जा सकता है। उनकी गोलकीपर मैनुअल नुएर को लेकर समस्या निपट गई है, और वह टीम में चुन लिए गए हैं। टीम की संभावनाएं टोनी क्रूज, मैट्स हमेल्स, थॉमस मुलर और मारियो गोमेज पर निर्भर हैं।
फ्रांस की टीम को इस बार की सबसे प्रतिभाशाली टीम माना जा रहा है। पर यह भी माना जा रहा है कि उसे सफलता पानी है, तो पॉल पोग्बा को शानदार प्रदर्शन करना होगा। इसी तरह इंग्लैंड के नये कोच गेरेथ साउथगेट ने टीम का हुलिया एकदम से बदल दिया है। टीम में सबसे कम उम्र खिलाड़ी 19 वर्षीय ट्रेंट एलेक्जेंडर है। इस टीम ने विश्व कप क्वालिफायर में 16 में से आठ मैच जीते, छह ड्रा खेले और सिर्फ दो हारे, इससे टीम की ताकत का पता चलता है। यह सही है कि खिताब की दावेदार कुछ ही टीमें हैं पर भाग लेने वाली टीमें किसी भी टीम का गणित बिगाड़ने की क्षमता रखती हैं। इसलिए फुटबाल का रोमांच हर किसी के दिलोदिमाग पर छाया रहने वाला है।