फसल बीमा योजना में हुए बदलाव

सहारा न्यूज ब्यूरो, नई दिल्ली

सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के कार्यान्वयन की समीक्षा के बाद इसमें कई बदलावों को अपनी मंजूरी प्रदान की है। कृषि मंत्रालय की ओर से यहां जारी एक विज्ञप्ति में बताया गया कि पिछले दो साल में फसल बीमा योजना के कार्यान्वयन, इससे मिले अनुभव इसके भागीदारों के साथ हुए विचार-विमर्श के बाद इसे और बेहतर बनाने के लिए इसमें कुछ बदलाव किए गए हैं। इन बदलावों को एक अक्टूबर से लागू कर दिया गया है। योजना के तहत किए गए बदलावों के अनुसार अब इसमें जोखिम का विस्तार किया गया है। योजना के दायरे में बारहमासी बागवानी फसलों को भी पायलट आधार पर इस योजना में शामिल किया गया है। अब तक इसमें सिर्फ मौसम आधारित फसलें ही शामिल थीं। इसके अलावा उपज या बीमा दावों की गणना के लिए पद्धति को और अधिक तर्कसंगत बनाया गया है। ओलावृष्टि, भूस्खलन, जलभराव, बादल फटने और प्राकृतिक कारणों से लगी आग को भी जोखिम में शामिल किया गया है। इसके अलावा फसल कटाई के बाद खेत में पड़ी फसलों को हुए मौसमी नुकसान को भी कवर प्रदान किया गया है।
इसके अलावा बीमा कंपनियों के लिए जुर्माने और प्रोत्साहन का भी प्रावधान किया गया। बीमा कंपनियों की सेवा में त्रुटि पर जुर्माना और उनके बेहतर प्रदर्शन पर उनको प्रोत्साहन दिये जाएंगे। जुर्माने की राशि सकल प्रीमियम का एक फीसद तक होगी। इसके लिए विस्तृत मापदंड बनाए गए हैं। बीमा कंपनियों को गैर ऋणी किसानों के लिए कवर राशि बढ़ाने के लिए भी कहा गया है। इसके अलावा बैंक द्वारा किसानों से लिया गया प्रीमियम यदि बीमा कंपनियों को समय से नहीं भेजा गया तो किसानो को देय बीमा दावों के भुगतान का दायित्व बैंक पर होगा। बीमा कंपनियों द्वारा किसानों को निर्धारित तिथि से दो माह से अधिक विलम्ब से बीमा दावों के भुगतान पर 12% की दर से वार्षिक ब्याज भी देय होगा। बीमा कंपनियों को राज्य सरकार द्वारा प्रीमियम सब्सिडी को निश्चित अवधि के तीन  माह के पश्चात तक भुगतान नहीं करने पर 12% वार्षिक व्याज देने का प्रावधान है।
गतिविधि के अनुसार विस्तृत मौसमी अनुशासन : इसके अलावा कृषि से जुड़ी सभी प्रमुख गतिविधियों के लिए भी नियम बनाए गए हैं। इसमें राज्यों द्वारा मौसम से जुड़ी अधिसूचना जारी करना, बीमा करने के लिए अंतिम तिथि तय करना आदि शामिल हैं।