फसल बीमा की राशि देने में देरी, तो कंपनी भरेगी ब्याज

वार्ता, नई दिल्ली

सरकार ने मंगलवार को कहा कि फसल बीमा के दावों का भुगतान समय पर सुनिश्चित करने के लिए जल्द ही वह ऐसे प्रावधान करेगी कि बीमा का हिस्सा देने में देरी पर राज्य सरकार और कंपनी को ब्याज भरना पड़े।
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधामोहन सिंह ने मंगलवार को लोकसभा में एक पूरक प्रश्न के उत्तर में बताया कि बीमा कंपनियों और राज्य सरकारों की ओर से राशि जारी करने में होने वाली देरी के कारण किसानों को बीमा राशि का भुगतान समय पर नहीं हो पाता है। सरकार ने इन समस्याओं को दूर करने के उपाय किये हैं और अब प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत दावों का भुगतान छह महीने के भीतर हो जाता है।
उन्होंने कहा कि सरकार इस समय को और कम करने के लिए ऐसी व्यवस्था करने जा रही है कि यदि बीमा कंपनी दो महीने के भीतर अपना हिस्सा नहीं देती है तो उसे 12 प्रतिशत की दर से उस पर ब्याज भी देना होगा। साथ ही यदि राज्य सरकारें भी अपना हिस्सा देने में देरी करेंगी तो उन्हें भी ब्याज देना होगा।
कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने बताया कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत 10 करोड़ किसानों का फसल बीमा किया गया है और पांच करोड़ 80 लाख किसानों के दावों का भुगतान किया गया है। सरकार ने इस मद में कुल 26 हजार करोड़ रुपये का भुगतान किया है। उन्होंने कहा कि किसानों की आत्महत्या चिंता का विषय है और सरकार उन्हें सशक्त बनाने पर काम कर रही है।
एक अन्य पूरक प्रश्न के उत्तर में राधामोहन सिंह ने कहा कि किसानों का ऋण माफ करने के बजाय सरकार उनके  सशक्तीकरण पर काम कर रही है। पहले की सरकारें योजनाएं कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए बनाती थीं, अब किसानों की आय बढ़ाने के ध्येय से योजनाएं बनायी जा रही हैं।
उन्होंने बताया कि 2009 से 2014 के बीच कृषि का बजट 1,21,082 करोड़ रुपये था जबकि 2014 से 2019 के बीच इस मद में 2,11,694 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया। इस प्रकार इसमें 74.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। बजटीय आवंटन के अलावा भी सरकार कॉर्पस निधि के जरिये किसानों की मदद कर रही है।