पेयजल के लिए संघर्ष कर रही है 75 फीसद आबादी

सहारा न्यूज ब्यूरो, नई दिल्ली

नीति आयोग ने बृहस्पतिवार को समग्र जल प्रबंधन सूचकांक जारी किया। इसमें गुजरात देश में अव्वल राज्य के रूप में उभरा है। उसके बाद क्रमश: मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र का स्थान है।
केंद्रीय सड़क परिवहन, राजमार्ग, पोत परिवहन एवं जल संसाधन मंत्री नितिन गडकरी द्वारा जारी इस रिपोर्ट में पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों में त्रिपुरा वर्ष 2016-17 में पहले स्थान पर रहा। उसके बाद क्रमश: हिमाचल प्रदेश, सिक्कम और असम का स्थान है।
नीति आयोग ने समग्र जल प्रबंधन के पहले सूचकांक के आधार पर राज्यों की सूची तैयार की है। यह सूचकांक नौ व्यापक क्षेत्रों में भूमिगत जल, निकायों के स्तर में सुधार, सिंचाई, कृषि गतिविधियां, पेयजल, नीति एवं संचालन व्यवस्था समेत कुल 28 विभिन्न संकेतकों के आधार पर तैयार किया गया है। इसमें जल की स्थिति के आधार पर राज्यों को दो विशेष समूह- पूर्वोत्तर तथा हिमालयी राज्य एवं अन्य राज्य में बांटा गया है। रिपोर्ट के अनुसार जल प्रबंधन के मामले में झारखंड, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और बिहार का प्रदर्शन सबसे खराब है। वर्ष 2015-16 के मुकाबले सुधार के मामले में सामान्य राज्यों में राजस्थान पहले स्थान पर रहा जबकि पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों में त्रिपुरा पहले स्थान पर है।
साठ करोड़ लोग झेल रहे संकट : देश की लगभग आधी आबादी यानी 60 करोड़ लोगों को पानी की गंभीर किल्लत झेलनी पड़ रही है जबकि 75 फीसद आबादी को पीने के पानी के लिए दूर-दूर तक जाना पड़ता  है।
रिपोर्ट के अनुसार गांवों में 84 फीसद आबादी जलापूर्ति से वंचित है। जो पानी उपलब्ध है उसमें भी 70 फीसद प्रदूषित है। वैश्विक जल गुणवत्ता सूचकांक में 122 देशों में भारत 120वें स्थान पर है। गडकरी ने कहा कि देश की सबसे बड़ी समस्या पानी की है। इसके लिए उन्होंने खराब जल प्रबंधन को जिम्मेदार बताया। उन्होंने कहा मैं कहता हूं पानी की कमी नहीं है, पानी के नियोजन की कमी है। राज्यों के बीच जल विवाद सुलझाना, पानी की बचत करना और बेहतर जल प्रबंधन कुछ ऐसे काम हैं जिनसे कृषि आमदनी बढ़ सकती है और गांव छोड़कर शहर आए लोग वापस गांव की ओर लौट सकते हैं। उन्होंने कहा कि चिरस्थायी संवहनीय कृषि का राज्यों का विकास में बड़ा योगदान होता है और इसके लिए पानी का प्रबंधन महत्वपूर्ण है। नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने कहा कि देश में पानी की स्थिति अच्छी नहीं है।