पेट्रोल डीजल की कीमतों में वृद्धि के लिए कांग्रेस, बीजेपी दोनों जिम्मेदार: मायावती

वार्ता, नई दिल्ली

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की अध्यक्ष मायावती ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार वृद्धि के लिये कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी दोनों को जिम्मेदार ठहराते हुए आज कहा कि तेल कंपनियों की मनमानी रोकने के लिए पेट्रोलियम पदार्थ का बाजार सरकार को अपने नियंत्रण में लेना चाहिए।

मायावती ने मंगलवार को यहां संवाददाताओं से कहा कि कल आयोजित किये गये भारत बंद के लिए कांग्रेस और भाजपा की सरकारों की आर्थिक नीतियां जिम्मेदार और कसूरवार हैं। इनकी आर्थिक नीतियों ने देश में ‘भारत बंद’ जैसे हालात पैदा कर दिये हैं।

उन्होंने कहा कि भाजपा ने सत्ता संभालने के मात्र छह महीने के भीतर ही पेट्रोल की तरह डीजल को भी सरकारी नियंत्रण से मुक्त कर दिया। कांग्रेस ने 2010 में पेट्रोल को नियंत्रण मुक्त किया था। बसपा प्रमुख ने कहा कि पेट्रोल-डीजल को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने के फैसले को बड़े आर्थिक सुधार के रुप में पेश किया गया जबकि यह गरीब और किसान विरोधी निर्णय था।
        
बसपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि भाजपा की सरकार कांग्रेस की ही आर्थिक नीतियों को आगे बढ़ा रही है और नोटबंदी तथा वस्तु एवं सेवाकर जैसे जनविरोधी फैसले ले रही है। उन्होंने कहा कि भारत जैसे देश में रसोई गैस, डीजल और पेट्रोल आदि बुनियादी वस्तुओं के बाजार पर सरकारी नियांण तथा हस्तक्षेप जरुरी है जिससे देश में संविधान के अनुरुप कल्याणकारी शासन स्थापित हो सके।

मायावती ने कहा कि केन्द्र सरकार जनता की परेशानियों से थोड़ी भी चिन्तित अथवा विचलित नजर नहीं आती है जिससे इस सरकार के जनविरोधी और अहंकारी होने के साथ इनके पूँजीपति और धन्नासेठ समर्थक होने का चेहरा भी बेनकाब होता है।
     
बसपा अध्यक्ष ने कहा कि भाजपा सरकार इस चुनावी साल में अपने उन बड़े-बड़े पूँजीपतियों और धन्नासेठों को कतई भी नाराज करना नहीं चाहती है जिनके धनबल पर वह केन्द्र की सत्ता में आयी है और फिर उन्हीं के बूते दोबारा सत्ता में आने का सपना देख रही है।
     
कांग्रेस पर भडास निकालते हुये मायावती ने कहा कि कांग्रेस ने जून 2010 में पेट्रोल को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने का फैसला किया था जबकि भाजपा सरकार ने कांग्रेस पार्टी की आर्थिक नीति को ना केवल जारी रखा बल्कि इसको और आगे बढाते हुये डीजल को भी सरकारी नियंत्रण से मुक्त कर दिया। इससे स्वाभाविक तौर पर फिर महँगाई के बढने के साथ खेती और किसानी भी काफी ज्यादा प्रभावित हुई।