पाक को आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई की नसीहत

सहारा न्यूज ब्यूरो, नई दिल्ली

भारत और अमेरिका ने बृहस्पतिवार को पाकिस्तान से यह सुनिश्चित करने को कहा कि उसके भूभाग का उपयोग आतंकी हमलों को अंजाम देने के लिए नहीं हो। दोनों देशों ने पाकिस्तान से यह भी कहा कि मुंबई, पठानकोट और उरी हमले सहित सीमा पार से हुए विभिन्न आतंकी हमलों के सरगनाओं को जल्दी से जल्दी न्याय की जद में लाया जाए।
पाकिस्तान को यह सख्त चेतावनी भारत और अमेरिका के बीच पहली बार हुई 2+2 वार्ता के बाद दी गई। वार्ता के दौरान विदेशमंत्री सुषमा स्वराज और रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने अमेरिकी विदेशमंत्री माइकल आर पोम्पिओ और रक्षामंत्री जेम्स मैटिस के साथ व्यापक विचार-विमर्श किया। वार्ता के बाद जारी एक संयुक्त बयान में कहा गया है कि मंत्रियों ने ज्ञात या संदिग्ध आतंकियों के बारे में सूचना साझा करने के प्रयासों को बढ़ाने और विदेशी आतंकियों के संबंध में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद संकल्प 2396 को लागू करने के अपने इरादे की घोषणा की। इसमें कहा गया है कि मंत्रियों ने इस क्षेत्र में परोक्ष आतंकवाद के किसी भी प्रयोग कींिनदा की और इस संदर्भ में उन्होंने पाकिस्तान को यह सुनिश्चित करने को कहा कि उसके नियंत्रण वाले भूभाग का उपयोग दूसरे देशों में आतंकी हमलों को अंजाम देने के लिए नहीं किया जाए।
2008 के मुंबई हमले के 10 साल पूरा होने के पहले, उन्होंने पाकिस्तान से मुंबई, पठानकोट (2016), उरी (2016) और सीमा पार से हुए अन्य आतंकी हमलों के साजिशकर्ताओं को शीघ्रता से न्याय की जद में लाने को कहा। सुषमा स्वराज ने संयुक्त संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि आतंकवाद विरोधी भारत-अमेरिका सहयोग ने नई गुणात्मक बढत और उद्देश्य हासिल किया है। उन्होंने कहा, हमने लश्कर-ए-तय्यबा आतंकियों के संबंध में अमेरिका की हालिया घोषणाओं का स्वागत किया। उन्होंने पाकिस्तान से उत्पन्न आतंकवाद के खतरे पर अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की चिंता को रेखांकित किया। इसने भारत और अमेरिका समान रूप से प्रभावित किया है। उन्होंने कहा, 26/11 के हमलों की 10वीं बरसी पर हमने इस आतंकी हमले के पीछे के सरगनाओं के लिए न्याय और दंड के महत्व की पहचान की। निर्मला सीतारमण ने अपनी टिप्पणी में कहा, भारत और अमेरिका आतंकवाद के लगातार खतरे और अन्य साझा सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।