पदोन्नति में आरक्षण संविधान पीठ तय करेगी

सहारा न्यूज ब्यूरो, नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी नौकरियों में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति वर्गों के लिए पदोन्नति में आरक्षण पर 12 साल पुराने अपने फैसले के खिलाफ अंतरिम आदेश पारित करने से इनकार किया। यह मामला क्रीमी लेयर लागू करने से जुड़ा हुआ था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस विषय पर सात न्यायाधीशों की संविधान पीठ गौर करेगी। 

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस अजय खानविलकर अर धनंजय चंद्रचूड़ की बेंच ने कहा कि वह केवल अंतरिम राहत देने के उद्देश्य से इस मामले में सुनवाई नहीं कर सकती क्योंकि इसे संविधान पीठ को पहले ही भेजा जा चुका है। बेंच ने कहा कि बड़ी पीठ द्वारा इस मामले में सुनवाई के लिए इसे भेजा जा चुका है।

एम नागराज मामले में पांच न्यायाधीशों के फैसले पर विचार के लिए सात न्यायाधीशों की पीठ गठित करने की जरूरत है। फिलहाल संविधान पीठ अन्य मामलों की सुनवाई कर रही है। अगस्त के प्रथम सप्ताह से पहले नई संविधान पीठ गठित करना मुश्किल है।

वर्ष 2006 के एम नागराज फैसले में कहा गया था कि सरकारी नौकरियों में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति वर्गों के लिए पदोन्नति में क्रीमी लेयर की अवधारणा लागू नहीं की जा सकती जैसा कि पहले के दो मामलों-1992 के इंदिरा साहनी और अन्य बनाम भारत संघ तथा 2005 के ई वी चिन्नैया बनाम आंध्र प्रदेश राज्य में फैसले दिए गए थे।