नौकरशाही में बदलाव

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यह पहली बार होगा जब केंद्र सरकार के अंदर संयुक्त सचिव स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों के पद पर केंद्रीय सिविल सेवा से बाहर के लोग बैठ सकेंगे। सरकार ने 10 पदों के लिए आवेदन मंगाया है, जिनके लिए राजस्व, वित्तीय सेवाओं, आर्थिक, कृषि,सहकारिता एवं कृषक कल्याण, सड़क परिवहन और राजमार्ग, नौवहन, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन, नवीन एवं अक्षय ऊर्जा, नागरिक विमानन और वाणिज्य के क्षेत्रों में विशेषज्ञता की अर्हता रखी गई है।

कार्मिंक एवं प्रशिक्षण विभाग से जारी परिपत्र में कहा गया है कि सरकार राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के लिए इच्छुक मेधावी एवं उत्साही भारतीय नागरिकों को संयुक्त सचिव स्तर पर सरकार से जुड़ने के लिए निमंत्रित करती है। संयुक्त सचिव सरकार में वरिष्ठ प्रबंधन का महत्वपूर्ण पद है। ये नीति निर्माण और विभिन्न कार्यक्रमों एवं योजनाओं को लागू कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मंत्रालय के सचिव या अवर सचिव को रिपोर्ट करते हैं। अभी तक आईपीएस, आईएएस और अन्य संबद्ध सेवाओं से संयुक्त सचिव की नियुक्ति की जाती है।

जाहिर है, केंद्रीय नौकरशाही के चरित्र में परिवर्तन की यह महत्त्वपूर्ण शुरु आत है। हालांकि इस समय कांग्रेस पार्टी इसका विरोध कर रही है लेकिन उसके कार्यकाल में भी योजना आयोग के तत्कालीन उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने इसका प्रस्ताव दिया था। प्रशासनिक आयोग ने भी इसकी अनुशंसा की थी।

वर्षो से एक कठोर परिधि के अंदर हो रही नियुक्तियों की परंपरा को तोड़ने के कदम को सभी लोग आसानी से गले नहीं उतार सकते। इसलिए आरंभ में इसका विरोध या कई प्रकार के किंतु-परंतु होंगे। सिविल सेवा के नौकरशाह भी इसे आसानी से पचा नहीं पाएंगे। किंतु आवश्यक नहीं कि जिसने केंद्रीय सिविल सेवा में सफलता पाई हो उसी के पास सारी विशेषज्ञता हो।

उससे बाहर के लोग भी अध्ययन, काम और अनुभव के कारण बेहतर विशेषज्ञ एवं कार्यनिष्ठ हो सकते हैं। वरिष्ठ पद पर सीधी भर्ती से मोदी सरकार ने इसे अमल में लाने की शुरु आत की है। हालांकि आरंभ में यह नियुक्ति तीन साल के अनुबंध पर होगी और प्रदशर्न के आधार पर उसे पांच साल के लिए बढ़ाया जा सकता है। हो सकता है कि आगे इसमें और वृद्धि हो और नियुक्तियां भी ज्यादा हों।