नहीं रहे सोमनाथ दा

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सोमनाथ चटर्जी अपनी उम्र लगभग पूरी करके गए हैं। दस बार सांसद, 15 वर्ष तक लोक सभा में पार्टी के नेता, एक बार लोक सभा अध्यक्ष तथा एक ही बार राष्ट्रमंडलीय संसद अध्यक्ष भी। यह है उनके सक्रिय राजनीतिक जीवन का संक्षिप्त वृत्त। किंतु यहां तक आने के लिए जनता के बीच उन्होंने कितना संघर्ष किया इसे नहीं भूलना चाहिए।

1971 का समय ऐसा नहीं था, जब माकपा जैसी पार्टी में जनता के बीच काम किए बिना लोक सभा चुनाव लड़ने का टिकट दिया जाए। एक घोर हिन्दुत्ववादी पिता के अभिभावकत्व में राजनीतिक शिक्षा ग्रहण करने वाले पुत्र का वामपंथी धारा को अपनाना उनके स्वतंत्र चिंतन क्षमता को दशर्ता है। उनके पिता निर्मल चन्द्र चटर्जी हिन्दू महासभा के संस्थापकों में से थे। सोमनाथ दा का पूरा संसदीय जीवन प्रेरक रहा। अपने आरंभिक दिनों में संसद के अंदर वे समाज के निचले तबकों की आवाज थे। उनके भाषण, उठाए गए मुद्दे एवं पूछे गए प्रश्न इनके प्रमाण हैं।

लोक सभा अध्यक्ष बनने के बाद उनके कई फैसले विवादित हुए। खासकर भाजपा ने उनकी भूमिका पर कई बार प्रश्न उठाए। किंतु वे अपने तौर-तरीकों पर कायम रहे। हालांकि जिस माकपा के वे कद्दावर नेताओं में शुमार थे, जिसको प. बंगाल में सत्ता में पहुंचाने तथा उसे बनाए रखने में उनकी भी प्रमुख भूमिका थी, उसी ने उनको पार्टी से बाहर करने का फैसला किया।

सोमनाथ दा के स्वतंत्र चिंतन का प्रमाण उस समय मिला जब जुलाई, 2008 में यूपीए सरकार से अमेरिका के साथ नाभिकीय समझौते पर समर्थन वापस लेने के बाद होने वाले शक्ति परीक्षण के लिए माकपा ने उन्हें लोक सभा अध्यक्ष पद से त्यागपत्र देने को कहा। उन्होंने यह कहते हुए इनकार कर दिया कि इस पद पर आने के बाद वे पार्टी के सदस्य नहीं हैं।

उस फैसले को लेकर हमेशा दो मत रहा है, किंतु इसका परिणाम मालूम होने के बावजूद वे अपनी मान्यता से डिगे नहीं। उसके बाद उनका संसदीय जीवन ही नहीं सक्रिय राजनीतिक जीवन भी खत्म हो गया। वे उस पीढ़ी के नेता थे जब लोग समाज सेवा की भावना से ही राजनीति या संसदीय जीवन में आते थे। उनके लिए संसद की गरिमा और मर्यादा सर्वोपरि थी।

धीरे-धीरे हमारे बीच से वैसे सारे नेता या तो चले गए या निष्प्रभावी हैं। उंगली पर गिनने लायक ही सक्रिय जीवन में बचे हैं। सोमनाथ दा भले हमारे बीच नहीं हैं, पर उनका पूरा राजनीतिक जीवन विचारधारा से परे भावी पीढ़ी के नेताओं और सांसदों के लिए आदर्श के रूप में उपस्थित है।