नमामि गंगे में तेजी

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यह समाचार निश्चय ही देश को थोड़ा सूकून देगा की ‘नमामि गंगे योजना’ में तेजी से प्रगति हो रही है। योजना की प्रगति की समीक्षा से संबंधित बैठक में केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास व गंगा संरक्षण मंत्री नितिन गडकरी ने जो कुछ कहा, उससे पता चलता है कि गंगा को स्वच्छ करने के लिए के लिए आरंभिक अभियानों में उसके केंद्र उत्तराखंड में 15 परियोजनाओं को पूरा कर लिया गया है।

उत्तराखंड में गंगा सफाई योजना के तहत कुल 31 परियोजनाएं हैं। इस तरह आधी पूरी हो गई हैं और शेष 16 के दिसम्बर तक पूरी हो जाने की संभावना है। अगर तय सीमा में यह पूरी हो गई तो गंगा अपने उद्गम प्रदेश में काफी हद तक स्वच्छ हो जाएगी। इन परियोजनाओं में मुख्यत: जल-मल शोधन संयंत्रों (एसटीपी), घाटों और शवदाह गृहों का निर्माण कार्य शामिल है।

गंगा पर काम करने वालों को पता है कि शहरों के सीवर, जिनसे मल मूत्र और गंदगी के साथ औद्योगिक कचरा तक गंगा में जाता है, वह इसके जल को प्रदूषित करने का प्रमुख कारण है। अगर इनको रोक दिया जाए तो पतित पावनी कही जाने वाली गंगा का काफी हद तक उद्धार हो जाएगा। उत्तराखंड में कुल 122 एमएलडी सीवरेज निकलने का अनुमान है, जबकि राज्य की जल-मल शोधन क्षमता फिलहाल 97.7 एमएलडी है।

ऐसे में एसटीपी की जिन परियोजनाओं पर काम चल रहा है, उनके पूरा हो जाने से राज्य की जल-मल शोधन क्षमता 131.7 एमएलडी हो जाएगी। हालांकि गंगा नदी उत्तराखंड के बाद उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल से होते हुए बहती है। जाहिर है, गंगा को यदि स्वच्छ बनाना है तो इन चारों राज्यों की ऐसी सभी परियोजनाओं को पूरा करना होगा।

इस समीक्षा बैठक में आई जानकारियों के अनुसार ‘नमामि गंगे योजना’ के तहत उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल की सरकार घरों से जल से सीवर निकासी (एचएससी) के लिए लोगों को वित्तीय मदद दे रही हैं। गंगा को निर्मल करना नरेन्द्र मोदी सरकार के बड़े वायदों में से एक रहा है। सरकार की पूरी कोशिश है कि अगले आम चुनाव के पूर्व उस पर ज्यादा-से-ज्यादा काम हो जाए ताकि लोगों को बताया जा सके कि पूर्व सरकारों ने अरबों खर्च करके हमारे देश की थाती और सभ्यताओं की स्रोत मां गंगा को साफ नहीं किया, उसे हमने कर दिया और शेष भी जल्द पूरा हो जाएगा।

नितिन गडकरी का कहना है कि मार्च 2019 तक 70 से 80 प्रतिशत गंगा स्वच्छ हो जाएगी। जब हमने इतने वर्षो प्रतीक्षा की तो कुछ महीने और सही।