द्रोणाचार्य अवार्ड की होड़-सुजीत मान हैं सबसे मजबूत दावेदार

सहारा न्यूज ब्यूरो, नई दिल्ली

हर साल 29 अगस्त को दिए जाने वाले खेल पुरस्कार इस बार सितम्बर तक के लिए टाल दिए गए। ऐसा इसलिए किया गया ताकि इंडोनेशिया के जकार्ता में आयोजित एशियन गेम्स में खिलाड़ियों और कोचों के प्रदर्शन को इसमें शामिल किया जा सके। खिलाड़ियों को तो उनके प्रदर्शन के आधार पर अवार्ड दे दिए जाएंगे लेकिन कोचों को दिए जाने वाला द्रोणाचार्य अवार्ड भी खिलाड़ियों के प्रदर्शन कर ही निर्भर करता है।

इंडोनेशिया में चल रहे एशियन गेम्स में भारतीय फ्रीस्टाइल कुश्ती टीम के साथ कोच रहे सुजीत मान का दावा इस साल मिलने वाले द्रोणाचार्य पुरस्कार में सबसे मजबूत नजर आता है। फ्रीस्टाइल में ही बजरंग पुनिया ने 65 किग्रावर्ग में स्वर्ण पदक जीता है। इससे पहले 2014 के ग्लास्गो कॉमनवेल्थ गेम्स में भी मान टीम के साथ कोच थे जहां सुशील कुमार ने स्वर्ण जीता था।

इस साल द्रोणाचार्य पुरस्कार के लिए सुजीत मान के अलावा सत्यव्रत कादियान, मंदीप, वीरेंद्र, रणवीर कुंडू और खलीफा जसराम के नामों की भी सिफारिश की गई है। भारतीय कुश्ती महासंघ ने जिन चार नामों को द्रोणाचार्य पुरस्कार के लिए भेजा है उसमें फेडरेशन ने सुजीत का नाम सबसे ऊपर रखा है।

जकार्ता से लौटने के बाद सुजीत ने कहा, ‘मैं देश की राष्ट्रीय टीमों के साथ 20 बार अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में जा चुका हूं। मैं एशियन गेम्स में पहली बार कोच के रूप गया और बजरंग ने स्वर्ण जीता। मैं 2014 के कॉमनवेल्थ गेम्स में भी टीम के साथ कोच था जिसमें सुशील कुमार ने स्वर्ण जीता था। कोच के रूप में मेरी जितनी उपलब्धियां और अनुभव हैं उसे देखते हुए उम्मीद है कि सरकार मुझे द्रोणाचार्य अवार्ड से मान्यता प्रदान करेगी।’ सुजीत 2014 से 2017 तक लगातार वि सीनियर चैंपियनशिप में टीम के कोच रहे हैं।

भारतीय कुश्ती महासंघ, रेलवे स्पोट्र्स प्रमोशन बोर्ड और गुरु हनुमान अखाड़े के द्रोणाचार्य अवार्डी कोच महासिंह राव ने सुजीत मान का नाम द्रोणाचार्य पुरस्कार के लिए प्रस्तावित किया है। जबकि उनके नाम का समर्थन ओलंपिक पदक विजेता पहलवान योगेर दत्त, एशियन गेम्स के स्वर्ण विजेता बजरंग, अजरुन अवार्डी राजीव तोमर, ओलंपियन संदीप तोमर, पवन और विनोद कुमार ने किया है।

मान ने 1987 में कुश्ती शुरू की थी और 2007-08 में डिप्लोमा करने के बाद जूनियर टीम के कोच बने थे। सुजीत 2011 में सीनियर टीम के साथ कोच के रूप में जुड़े और तब से अब तक सीनियर कोच के रूप में चले आ रहे हैं। सुजीत गुरु हनुमान अखाड़े के अलावा रेलवे के भी कोच हैं।