देश विरोधी बातें

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पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) पुराने एजेंडे पर लौटती दिख रही है। एक तरफ पार्टी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती अलगाववादी राज आलाप रही है तो वहीं उनकी पार्टी का सांसद देश बंटवारे की धमकी दे रहा है। दल के 19वें स्थापना दिवस के मौके पर महबूबा ने अनुच्छेद 35-ए को बचाने की अपील राज्य के सभी दलों के अलावा अलगाववादी गुटों से की है।

महबूबा ने कहा कि अनुच्छेद 35-ए राज्य के लिए एक गंभीर चुनौती है। इसे बचाने के लिए मुख्यधारा के सभी राजनीतिक दल और अलगाववादी मतभेद भुलाकर साथ आएं। साफ तौर पर महबूबा अब सत्ता का सुख भोगने के बाद एक बार फिर से जहर उगलने के खेल में लग गई हैं। अनुच्छेद 35-ए को बचाने के वास्ते देश विभाजक गुटों को भी एक प्लेटफार्म पर आने की गुहार लगाना यही परिलक्षित करता है कि कश्मीर का मसला केंद्र सरकार के लिए सुलझाना उतना आसान नहीं है, जितना दावा सरकार और सेना करती रही है।

खासकर जब किसी राज्य की मुख्यमंत्री और उनका दल अलगाववादी रवैये के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हो। यह देश के लिए शुभ संकेत नहीं हैं। इससे पहले भी देश की अखंडता पर जम्मू-कश्मीर के नेता और सियासी दल हमला करते रहे हैं। बात यहीं तक रहे तो भी गनीमत है। पीडीपी के 19वें स्थापना दिवस समारोह में जहर भरी बातें उनके एक सांसद ने भी की।

मुजफ्फर हुसैन बेग ने गोरक्षा के नाम पर देश के बंटवारे की धमकी तक दे डाली। देश की गंगा-जमुनी तहजीब की अनदेखा करते हुए बेग ने केंद्र सरकार को धमकाते हुए कहा कि अगर गोरक्षा के नाम पर मुसलमानों को मारना बंद नहीं हुआ तो देश का बंटवारा तय है। क्या ऐसे बयान देने वालों और देश की एकता पर हमला करने वालों के साथ किसी तरह की मुरव्वत की जानी चाहिए?

दरअसल, सारा खेल सत्ता की मलाई खाने का है। हमेशा से पत्थरबाजों, देशविरोधी ताकतों के साथ गलबहियां करने वालों को देश की संप्रभुता रास नहीं आई है। सरकार को ऐसी धमकियों को हल्के में नहीं लेना होगा। कोशिश होनी चाहिए कि आतंकवाद पर मुलायम रुख अपनाने और राज्य व देश में अमन बहाली की राह में रोड़ा अटकाने वालों पर सख्ती हो। ऐसे लोग न केवल देश बल्कि कश्मीरियत, जम्हूरियत और इंसानियत के लिए बड़ा खतरा हैं।