दिल्ली : सीलिंग के लिए एडवांस नोटिस देने की जरूरत नहीं

सहारा न्यूज ब्यूरो, नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रिहायशी इलाकों में चल रही कामर्शियल और औद्योगिक इकाइयों को सील करने के लिए एडवांस नोटिस देने की आवश्यकता नहीं है। इस तरह की गतिविधियां अवैध हैं। नोटिस देने का मतलब होगा कि गैर-कानूनी हरकत करने वालों को आगाह करना। नोटिस मिलने पर वह अपनी इकाइयां बंद कर लेंगे। 48 घंटे का नोटिस देने की जरूरत नहीं है। हालांकि एएसजी ने कहा कि 15 दिन का नोटिस देने की कानूनी अनिवार्यता है। अदालत ने सरकार को इस बारे में विस्तृत हलफनामा दायर करने को कहा।
जस्टिस मदन लोकुर और दीपक गुप्ता की बेंच ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि दिल्ली में गैरकानूनी औद्योगिक इकाइयों को रोकने के लिए एक निगरानी समिति गठित होने के 14 साल बाद भी इनमें से करीब पांच हजार इकाइयां अब भी रिहायशी इलाकों में चल रही हैं।  
दिल्ली के मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली समिति ने कोर्ट को आासन दिया कि इस तरह की अवैध इकाइयों को 15 दिन के अंदर सील किया जाएगा। अदालत ने कहा कि समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि रिहायशी इलाकों में गैरकानूनी रूप से चल रही इस तरह की सभी औद्योगिक इकाइयों को 15 दिन में बंद किया जाएगा और उनके बिजली तथा पानी कनेक्शन काटे जाएंगे।   
समिति ने शीर्ष अदालत में सौंपी रिपोर्ट में कहा था कि इस साल अगस्त तक 15 हजार 888 अवैध इकाइयों को बंद किया गया। अदालत ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि 14 साल बाद भी, संबंधित प्राधिकार, मुख्य सचिव, पुलिस आयुक्त, नगर निगम आयुक्त और दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के उपाध्यक्ष इन अवैध इकाइयों को बंद नहीं करा सके। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि अब यह कहा गया है कि 15 दिन में आवश्यक काम किया जाएगा। अदालत ने इस मामले में आगे की सुनवाई के लिए 26 नवंबर की तारीख तय की है और समिति से यह सुनिश्चित करने को कहा कि 15 दिन में इन औद्योगिक इकाइयों को सील करने के उसके फैसले का अनुपालन हो।