दिल्ली : जहरीली हवा से 2.5 लाख लोग बने सांस के रोगी

वार्ता, नई दिल्ली

वायु प्रदूषण के कारण राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पिछले साल दो लाख 61 हजार लोग सन संबंधी बीमारियों के शिकार हुये जिनमें 357 की मौत हो गयी। राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रोफाइल के आंकड़ों के अनुसार, पिछले चार साल में सन संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों की संख्या में कमी आ रही है, लेकिन इनसे मरने वालों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।

वर्ष 2016 में कुल तीन लाख 55 हजार लोग इन बीमारियों से पीड़ित रहे जिनमें 210 की मौत हो गयी।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पर्यावरण एवं वन से संबंधित संसद की स्थायी समिति ने संसद में आज पेश एक रिपोर्ट में ये आंकड़े साझा करते हुये पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को सलाह दी है कि वह वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने में रेल तथा नागर विमानन मंत्रालय से भी आर्थिक मदद ले।

रिपोर्ट में कहा गया है कि वायु प्रदूषण के कारण वर्ष 2013 से 2018 के बीच पांच साल में दिल्ली में कुल 981 लोगों की मौत हो चुकी है। इसमें कहा गया है कि दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में हवा की खराब गुणवत्ता के कारण लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पर रहा है तथा इस पर तुरंत सुधारात्मक कदम उठाये जाने की जरूरत है।

दिल्ली-एनसीआर के प्रदूषण के लिए जंगलों की कटाई को प्रमुख कारण बताते हुये समिति ने कहा है कि दिल्ली के आसपास के इलाकों में कभी घने जंगल हुआ करते थे जो दिल्ली को पड़ोसी राज्यों से आने वाली धूल की आंधी को रोकने का काम करते थे। ये जंगल अब धीरे-धीरे समाप्त हो रहे हैं। उसने दिल्ली के साथ ही हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण अभियान चलाने की सलाह दी है।

समिति ने विश्व बैंक की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुये कहा है कि वर्ष 2013 में वायु प्रदूषण के कारण देश को 55.39 अरब डॉलर का श्रम नुकसान हुआ था जो सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 0.84 प्रतिशत है। पिछले पांच साल में वायु प्रदूषण बढ़ा है और उसका अनुमान है कि अब तक इस कारण होने वाला नुकसान जीडीपी के एक प्रतिशत से ज्यादा हो चुका होगा। समिति का कहना है कि यदि  स्थिति में सुधार के उपाय नहीं किये गये तो स्थिति और खराब होगी। इसका पर्यटन क्षेत्र की विदेशी मुद्रा आय पर भी असर होगा।