दागी सांसदों, विधायकों की सही संख्या बताएं राज्य

सहारा न्यूज ब्यूरो, नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों तथा हाई कोटरे से कहा है कि वे सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित सारे मामलों का पूरा विवरण पेश करें। अदालत ने 25 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों तथा उनके हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल से कहा कि वे इस समय लंबित उन मुकदमों की सही संख्या बताएं, जिन्हें पूरी तरह सांसदों और विधायकों के मामलों की सुनवाई के लिए गठित विशेष अदालतों को सौंपा जाना है।
जस्टिस रंजन गोगोई और नवीन सिन्हा की बेंच ने इस तथ्य का संज्ञान लिया कि 11 राज्यों में 12 विशेष अदालतें गठित की जा चुकी हैं। अदालत ने राज्यों और हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल से कहा कि अपेक्षित जानकारी उसके समक्ष 10 अक्टूबर तक पेश की जाए। इस मामले में अब 10 अक्टूबर को आगे सुनवाई होगी।
अदालत ने अपने आदेश में इस तथ्य को नोट किया कि गुजरात, राजस्थान, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर, अरुणाचल प्रदेश, असम, पंजाब और चंडीगढ़ सहित 25 राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों ने सुप्रीम कोर्ट के एक नवम्बर, 2017 और इस साल 21 अगस्त के आदेश के बावजूद अभी तक कोई जानकारी नहीं दी है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि हम स्पष्ट रूप से दो प्राधिकारियों-राज्यों के मुख्य सचिवों और हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश देते हैं कि वे इस समय लंबित उन मामलों, जिन्हें विशेष अदालतों को सौंपने की आवश्यकता है, की सही संख्या बताएं, यह भी बताएं कि क्या गठित की गई 12 विशेष अदालतें काम कर रही हैं और क्या स्थानांतरित किए जाने वाले मुकदमों की संख्या को देखते हुए अतिरिक्त अदालतों के गठन की आवश्यकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह जानकारी मिलने के बाद शीर्ष अदालत, यदि जरूरी हुआ, सुनवाई की प्रत्येक तारीख पर कई राज्यों को एकसाथ करके अपने आदेशों के अनुपालन की निगरानी करेगी। याचिकाकर्ता और अधिवक्ता अश्चिनी कुमार उपाध्याय की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता साजन पूवैया ने न्याय विभाग के हलफनामे का जिक्र किया और कहा कि 11 राज्यों में 12 विशेष अदालतें गठित की गई हैं लेकिन इन अदालतों को सौंपे गए मुकदमों के बारे में कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार के हलफनामे के अनुसार आंध्र प्रदेश में एक विशेष अदालत गठित की गई है जिसमें 25 मुकदमे स्थानांतरित किए गए हैं लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि पूरे राज्य में सांसदों और विधायकों से संबंधित सिर्फ 25 मुकदमे ही हैं।