ताज को संरक्षित करें या गिरा दे

सहारा न्यूज ब्यूरो, नई दिल्ली

ताजमहल की खूबसूरती बरकरार रखने में सरकार के रवैये से नाराज सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार ताज को संरक्षित करे या उसे गिरा दे। सरकार का रवैया ढुलमुल है। सुप्रीम कोर्ट ने ताज की तुलना फ्रांस के एफिल टावर से की और कहा कि हमारा ताज कहीं ज्यादा आकषर्क है लेकिन सरकारी रवैये के कारण अपेक्षित पर्यटक यहां नहीं आ पाते।

सुप्रीम कोर्ट ने विश्व धरोहर की संरक्षा के प्रति केन्द्र, उत्तर प्रदेश सरकार और तमाम प्राधिकारों को उनके उदासीन और ढुलमुल रवैये के लिए आड़े हाथ लिया। जस्टिस मदन लोकुर और दीपक गुप्ता की बेंच ने अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार ताज को बंद कर सकती है। आप चाहें तो इसे ध्वस्त कर सकते हैं और यदि आपने पहले से ही फैसला कर रखा है तो इससे छुटकारा पा सकते हैं। अदालत ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार को परवाह नहीं है। कोई कार्य योजना या दृष्टि दस्तावेज अभी तक नहीं मिला है। आप या तो इसे गिरा दीजिए या आप इसकी खूबसूरती बहाल कीजिए।

सुप्रीम कोर्ट मुगल बादशाह शाहजहां द्वारा अपनी बेगम मुमताज महल की याद में आगरा में बनाए गए ताज महल को संरक्षित रखने और उसके आसपास के क्षेत्र में विकास कार्यों की निगरानी कर रहा है। सफेद संगमरमर से बना यह स्मारक यूनेस्को के विश्व धरोहर  स्थलों में शामिल है। इस मामले में सुनवाई के दौरान अदालत ने ताजमहल और पेरिस में एफिल टावर के बीच समानता की ओर ध्यान आकषिर्त करते हुए कहा कि यह स्मारक संभवत: ज्यादा खूबसूरत है लेकिन भारत मौजूदा हालातों की वजह से लगातार पर्यटक और विदेशी मुद्रा गंवा रहा है।

एफिल टावर का जिक्र करते हुए अदालत ने कहा कि भारत में सुरक्षा को लेकर चिंता है लेकिन दूसरे देशों में टीवी टावर की तरह टावर बनाए गए हैं जहां से पर्यटक पूरे शहर का नजारा देख सकते हैं। विदेशी शहरों में आपको शहर का विहंगम दृश्य देखने के लिए इस तरह के टावर मिल जाएंगे। यहां इस तरह के टावर नहीं हैं। ताज के लिए पर्यटकों की तादाद में दस गुना वृद्धि संभव है। लेकिन लगता है कि किसी को कोई परवाह ही नहीं है। इससे सिर्फ ताज को ही नहीं बल्कि देश को आर्थिक नुकसान हो रहा है।