जानें, 5वीं पास प्रेम कैसे बना जुर्म की दुनिया का बेताज बादशाह मुन्ना बजरंगी

वार्ता , बागपत/लखनऊ

उत्तर प्रदेश में सोमवार को बागपत जिले की जेल में अंडरवर्ल्ड डॉन प्रेम प्रकाश सिंह उर्फ मुन्ना बजरंगी की गोली मारकर हत्या कर दी गई।

2005 में भाजपा विधायक कृष्णानंद राय की हत्या के आरोप में मुन्ना बजरंगी 2009 से जेल में है। उत्तर प्रदेश पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी पर सात लाख रूपये का इनाम रखा था जिसके बाद मुम्बई में उसे गिरफ्तार किया गया। जेल में रहकर उसने 2012 के विधानसभा चुनाव में हिस्सा लिया था। जौनपुर के मडियाहूं सीट से अपना दल और पीस पार्टी के संयुक्त उम्मीदवार के तौर पर वह चुनाव लड़ा और 12 फीसदी मत हासिल कर तीसरा स्थान प्राप्त किया था।

मुन्ना बजरंगी का जन्म 1967 में उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के पूरेदयाल गांव में हुआ था। उसके पिता पारसनाथ सिंह उसे पढ़ा लिखाकर बड़ा आदमी बनाने का सपना संजोए थे लेकिन प्रेम प्रकाश उर्फ मुन्ना बजरंगी ने पांचवीं कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ दी और किशोर अवस्था तक आते आते जुर्म की दुनिया में चला गया।

मुन्ना बजरंगी को हथियार रखने का शौक था, वह फिल्मों की तरह एक बड़ा गैंगेस्टर बनना चाहता था। यही वजह थी कि 17 साल की उम्र में ही उसके खिलाफ जौनपुर के सुरेही थाना में उसके खिलाफ मारपीट और अवैध असलहा रखने का मामला दर्ज किया गया था। उसके बाद मुन्ना ने कभी पलटकर नहीं देखा और वह जुर्म के दलदल में धंसता चला गया। अस्सी के दशक में उसने पहली हत्या की और वह अपराध की दुनिया में अपनी पहचान बनाने की कोशिश में लगा था।

इसी दौरान उसे जौनपुर के स्थानीय दबंग माफिया गजराज सिंह का संरक्षण हासिल हो गया था। मुन्ना अब उसके लिए काम करने लगा था। वर्ष 1984 में मुन्ना ने लूट के लिए एक व्यापारी की हत्या कर दी थी। बाद में गजराज के इशारे पर ही उसने जौनपुर में भारतीय जनता पार्टी(भाजपा)नेता रामचंद्र सिंह की हत्या करके पूर्वांचल में दबदबा कायम कर लिया।

पूर्वांचल में अपनी साख बढ़ाने के लिए मुन्ना बजरंगी 90 के दशक में क्षेत्र के बाहुबली नेता मुख्तार अंसारी के साथ जुड़ गया। इन लोगों का मऊ से कार्य संचालित होता था। इसका असर पूरे पूर्वांचल पर था। मुख्तार अंसारी ने अपराध की दुनिया से राजनीति में कदम रखा और 1996 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर मऊ से विधायक निर्वाचित हुए। उसके बाद इस गिरोह की ताकत बहुत बढ़ गई और मुन्ना बजरंगी सरकारी ठेकों को प्रभावित करने लगा था। वह लगातार मुख्तार अंसारी के निर्देशन में काम कर रहा था।

ठेकेदारी और सरकारी ठेकों के अलावा वसूली के कारोबार पर मुख्तार अंसारी का कब्जा था, लेकिन इस दौरान तेजी से उभरते भाजपा विधायक कृष्णानंद राय उनके लिए चुनौती बनने लगे। राय पर मुख्तार के विरोधी ब्रिजेश सिंह का हाथ था। उसके संरक्षण में कृष्णानंद राय का दबदबा इलाके में बढ़ रहा था। मुख्तार और कृष्णानंद राय अपनी ताकत बढ़ा रहे थे। उनके संबंध अंडरवर्ल्ड के साथ भी जुड़े गए थे।

कृष्णानंद राय का बढ़ता प्रभाव मुख्तार को रास नहीं आ रहा था और मुख्तार ने कृष्णानंद राय को खत्म करने की जिम्मेदारी मुन्ना बजरंगी को सौंप दी। मुख्तार के फरमान के बाद मुन्ना बजरंगी ने भाजपा विधायक कृष्णानंद राय को खत्म करने की साजिश रची और 29 नवंबर 2005 को मुन्ना बजरंगी ने अपने गुगरें के साथ कृष्णानंद राय के अलावा उनके छह साथियों की हत्या कर दी।

इस हत्याकांड ने सूबे की सियासत में हलचल मचा दी थी। हर कोई मुन्ना बजरंगी के नाम से खौफ खाने लगा। इस हत्या को अंजाम देने के बाद वह मोस्ट वॉन्टेड बन गया था। राय की हत्या के बाद मुन्ना बजंरगी की तलाश में उत्तर प्रदेश पुलिस, एसटीएफ और सीबीआई लगी थी। उस पर सात लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया था। उस पर हत्या, अपहरण और वसूली के कई मामलों में शामिल होने के आरोप है।

प्रदेश पुलिस और एसटीएफ लगातार मुन्ना बजरंगी को तलाश कर रही थी। पुलिस के बढ़ते दबाव के कारण उसका उत्तर प्रदेश और बिहार में रहना मुश्किल हो गया था। दिल्ली भी उसके लिए सुरक्षित नहीं थी। इसलिए मुन्ना भागकर मुंबई चला गया। उसने एक लंबा अरसा वहीं गुजारा। इस दौरान मुन्ना बजरंगी कई बार विदेश में भी रहा। इस बीच उसके अंडरवर्ल्ड के लोगों से रिश्ते भी मजबूत होते जा रहे थे। वह मुंबई से ही फोन पर अपने लोगों को दिशा निर्देश देता था।

मुन्ना बजरंगी ने राजनीति में आजमाई किस्मत और लोकसभा चुनाव में गाजीपुर लोकसभा सीट पर अपना एक डमी उम्मीदवार खड़ा करने की कोशिश की। मुन्ना बजरंगी एक महिला को गाजीपुर से भाजपा का टिकट दिलवाने की कोशिश कर रहा था। जिसके चलते उसके मुख्तार अंसारी के साथ संबंध भी खराब हो रहे थे। यही वजह थी कि मुख्तार उसके लोगों की मदद भी नहीं कर रहा था। मुन्ना बजरंगी ने कई राजनीति दलों में अपनी पैंठ बनाने की कोशिश की लेकिन उसे सफलता नहीं मिली।

उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में मुन्ना बजरंगी के खिलाफ मुकदमे दर्ज थे। वह पुलिस के लिए परेशानी का सबब बन चुका था। उसके खिलाफ सबसे ज्यादा मामले उत्तर प्रदेश में दर्ज हैं, लेकिन 29 अक्टूबर 2009 को दिल्ली पुलिस ने मुन्ना को मुंबई के मलाड इलाके में नाटकीय ढंग से गिरफ्तार कर लिया था। माना जाता है कि मुन्ना को अपने एनकाउंटर का डर सता रहा था। इसलिए उसने खुद एक योजना के तहत दिल्ली पुलिस से अपनी गिरफ्तारी कराई थी।

मुन्ना की गिरफ्तारी के इस ऑपरेशन में मुंबई पुलिस को भी ऐन वक्त पर शामिल किया गया था। बाद में दिल्ली पुलिस ने कहा था कि दिल्ली के विवादास्पद एनकाउंटर स्पेशलिस्ट राजबीर सिंह की हत्या में मुन्ना बजरंगी का हाथ होने का शक था, इसलिए उसे गिरफ्तार किया गया और तब से उसे अलग अलग जेल में रखा जा रहा था।

इस दौरान उसके जेल से लोगों को धमकाने, वसूली करने जैसे मामले भी सामने आते रहे हैं। मुन्ना बजरंगी का दावा है कि उसने अपने 20 साल के आपराधिक जीवन में 40 हत्याएं की हैं।