जलयान से तीर्थ

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नागर विमानन मंत्रालय द्वारा देश में जलाशयों में हवाई अड्डे और यान अड्डे बनाने के प्रस्ताव को स्वीकार करना निश्चय ही महत्त्वपूर्ण घटना है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भारत के तीर्थस्थानों एवं पर्यटन स्थलों के लिए विशेष यातायात सुविधा की बात लंबे समय से कर रहे हैं। पहले उन्होंने इसके लिए विशेष रेल एवं बसों की बात की, जिनमें कुछ आरंभ भी हो चुके हैं।

एम्फीबियन यानी जल एवं हवा दोनों में उड़ान भरने वाले जहाजों के परिचालन की योजना भी उन्हीं के मस्तिष्क की उपज है। कुछ समय पहले तक इसे कल्पना मानने वालों को उत्तर देने के लिए उन्होंने गुजरात चुनाव के पूर्व स्वयं ऐसे जहाज से एक यात्रा की थी। तब से माना जा रहा था कि इस संबंध में जल्द ही घोषणा होगी।

नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने इस संबंध में पिछले जून में ही नियमन जारी किया था, जिसमें जलाशयों में बने एयरोड्रम के लाइसेंस की जरूरतों एवं प्रक्रियाओं का जिक्र किया गया था। इस क्षेत्र में व्यापार की कितनी संभावनाएं हैं, कितने लोग एम्फीबियन विमानों से यात्रा करना पसंद करेंगे, इसके बारे में कोई निश्चित आंकड़ा नहीं है, इसलिए इसकी शुरुआत प्रयोग के तौर पर ही होगी।

नदियों, झीलों एवं समुद्री स्थलों से जुड़े तीर्थस्थानों और पर्यटन स्थलों पर ही यह सेवा संभव है इसलिए उन्हीं जगहों पर हवाई अड्डे बनेंगे। प्रायोगिक तौर पर भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) ने इसके ओडिशा, गुजरात, असम, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश में जगहों की पहचान पहले ही कर ली है। पहले चरण में ओडिशा में चिलका झील और गुजरात में सरदार सरोवर बांध और साबरमती रिवर फ्रंट पर इनके लिए हवाई अड्डे बनेंगे।

जब तक हवाई अड्डों और विमान अड्डों का निर्माण होकर इसका परिचालन आरंभ नहीं होता तब तक इसकी पूरी रूपरेखा स्पष्ट नहीं होगी। स्वाभाविक ही जलाशय में बने एयरोड्रम के लिए आवेदन करने वाले किसी भी निकाय को रक्षा मंत्रालय, गृह मंत्रालय, पर्यावरण एवं वन मंत्रालय और नौवहन मंत्रालय समेत विभिन्न प्राधिकरणों की मंजूरी लेनी होगी और इसमें भी समय लगेगा।

किंतु है यह अत्यंत ही आकषर्क योजना। बहुत सारे यात्री इस सेवा का लाभ उठाना चाहेंगे। इससे समय की भी बचत होगी और सड़क मार्ग यातायात से भीड़ कम होगी। वैसे भी नागर विमानन मंत्रालय उड़ान योजना के तीसरे चरण के तहत सीप्लेन का परिचालन शुरू करने के प्रस्ताव पर विचार कर रहा है। यह एक प्रकार से उसी की शुरुआत होगी।