जब मौत के करीब पहुंच गए थे संजय, मां की आवाज ने दी नई जिंदगी...

वार्ता, नई दिल्ली

बॉलीवुड के सबसे मशहूर मुन्ना भाई यानी संजय दत्त की मां नरगिस जीते जी अपने बेटे की गलतियों पर पर्दा डाले रखती थीं जिससे संजू नशे की दुनिया में चले गए थे लेकिन उनके निधन के तीन साल बाद नरगिस की ही आवाज ने संजू को नया जीवन दे डाला।

प्रसिद्ध लेखक यासिर उस्मान ने अपनी किताब‘बॉलीवुड का बिगड़ा शहजादा: संजय दत्त’में इस बात का खुलासा किया है कि कैसे  नरगिस की आवाज ने उनके बेटे को नशे के दलदल से बाहर निकालकर एक नया जीवन दिया। नरगिस दत्त का निधन हो चुका था लेकिन संजय दत्त की हालत ऐसी थी कि वे नशे और ड्रग्स लेने की आदत से बाहर नहीं निकल पा रहे थे।

संजय के पिता सुनील दत्त अपनी पत्नी की मौत से सदमे में चल रहे थे और संजय की हालत ने उन तोड़कर रख दिया था लेकिन एक पिता के नाते उन्होंने संजय को सुधरने की आखिरी कोशिश की। वह 1984 की जनवरी में संजय को लेकर अमेरिका चले गए जहां दक्षिण मियामी के एक अस्पताल में उन्हें भर्ती कराया गया।

लेखक उस्मान के अनुसार अस्पताल में डॉक्टर ने संजय को ड्रग्स की सूची दी कि वह इनमें से जो ड्रग्स लेते हैं उन पर निशान लगा दें तो संजय का जवाब डॉक्टर को ही हैरान कर गया। संजय ने कहा, ये तो सब को टिक करना पड़ेगा।

यानी संजय नशे के मामले में सीमा पार कर चुके थे। उस्मान के अनुसार डॉक्टर ने सुनील दत्त से कहा, जिस तरह से ये ड्रग्स ले रहे थे उनको अब तक मर जाना चाहिए था। हमें तो हैरानी है कि इस हद तक ड्रग्स लेने के बावजूद वह जिन्दा हैं।

संजय का मियामी में लम्बा रिहैब चला जो काफी थकाने वाला था। किताब के अनुसार संजय ने एक बातचीत में स्वीकार किया था कि वह मरना चाहते थे ताकि अपनी मां के पास जा सकें जिनकी स्मृतियां हर वक्त उन्हें परेशान कर रही थीं। उधर सुनील दत्त को मुंबई में जैसे आभास हो रहा था कि संजय अपना आत्मविश्वास खो रहे हैं और फिर से ड्रग्स के चक्कर में पड़ सकते हैं।

सुनील दत्त अपने मुश्किल वक्त में नरगिस की टेप रिकॉर्डिंग को सुनते थे जो उन्होंने न्यूयॉर्क के अस्पताल में नरगिस के इलाज के समय रिकॉर्ड किये थे। संजय को बचाने की आखिरी कोशिश में उन्होंने संजय को वो टेप भेजे। उन्होंने अपने पिता के भेजे हुए टेप को जैसे ही प्ले किया तो अचानक कमरे में नरगिस की आवाज गूंजने लगी और इस आवाज ने मानो एक झटके में संजू बाबा का दिल बदल दिया।

नरगिस ने कहा, किसी भी चीज से अधिक संजू ..अपनी इंसानियत को बनाये रखना। अपने चरित्र को संभाले रखना। कभी दिखावा नहीं करना। हमेश विनम्र बने रहना और सदा बड़ों की इज्जत करना, यही बात तुमको बहुत आगे तक लेकर जायेगी और यह तुमको काम करने की ताकत देगी।

किताब के अनुसार संजू ने अपनी मां को याद करते हुए कहा .. मैं रोने लगा और रोता रहा। मैं चार दिनों तक लगातार रोया। उन टेपों और उनकी आवाज ने मेरी जिंदगी को बदल कर रख दिया। इस वाकये ने संजू की पूरी जिंदगी बदल दी और उन्हें अपने पैरों पर ऐसा खड़ा किया कि वो आज बॉलीवुड के मुन्ना भाई बन गए।

नशे के दलदल से बाहर निकलने के बाद संजय को अपने जीवन के सबसे कठिन दौर में मुंबई बम विस्फोटों के मामले में हथियार रखने के कारण जेल जाना पड़ा जहां जीवन के बेहद मुश्किल हालत में गीता, रामायण और नेल्सन मंडेला की आत्मकथा उनके साथी बन गए। संजय एक लम्बी सजा काट कर जेल से रिहा हुए और उन्होंने अपनी फिल्मों पर ध्यान लगाना शुरू किया।

उस्मान के अनुसार मुन्ना भाई एमबीबीएस में संजय पहले कैंसर के मरीज की छोटी भूमिका निभाने वाले थे लेकिन मुख्य भूमिका करने वाले शाहरुख खान पीठ दर्द के कारण फिल्म से हट गए और विधु विनोद चोपड़ा ने संजय को मुख्य भूमिका ऑफर की जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया। फिल्म के निर्माता निर्देशक ने संजय के पिता की भूमिका के लिए सुनील दत्त को साइन किया। इस फिल्म ने नया इतिहास बनाया और संजू को मुन्ना भाई बन दिया।

फिल्म के क्लाइमैक्स में पिता का बेटे को जादू की झप्पी के लिए कहना और संजू का सुनील दत्त के गले से लगना बेहद मार्मिक दृश्य था। यह वह दृश्य था जिसमें पश्चाताप करता हुआ एक बेटा अपने पिता को गर्व करने का मौका देता है।

जब इस दृश्य के बारे में संजू से पूछा गया तो कहा उन्होंने (सुनील दत्त) मुझे बहुत जोर से गले लगाया. ऐसा लगा जैसे वह मुझसे कुछ कहना चाहते हों। लेकिन वो कह नहीं सके. वह मेरे प्रति अपने प्यार को कभी जताते नहीं थे लेकिन उस दिन उन्होंने जता दिया।