जदयू-भाजपा साथ

,

जनता दल यू की राजधानी दिल्ली में आयोजित कार्यकारिणी के बाद तत्काल उसके राजग में रहने या बाहर जाने संबंधी अटकलें खत्म हो जानी चाहिए। अपने प्रस्ताव में पार्टी ने राजग का भाग होने की बात कही है। स्वयं नीतीश कुमार ने अपने भाषण में गठबंधन को जारी रखने पर जोर दिया। उल्टे उन्होंने यह कहा कि कांग्रेस जब तक भ्रष्टाचार पर अपना मत स्पष्ट नहीं करती तब तक उसके बारे में कुछ सोचा ही नहीं जा सकता।

भ्रष्टाचार से इनका इशारा लालू प्रसाद के परिवार से ही था। इसका संदेश यह था कि हमने लालू परिवार के ज्यादातर सदस्यों पर भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण साथ छोड़ा है, और इसमें संशोधन की कोई गुंजाइश नहीं है। पार्टी भ्रष्टाचार से समझौता नहीं करेगी, इस स्पष्ट वक्तव्य का अर्थ ही यही है।

कार्यकारिणी के कुछ समय पहले तक ये अटकलें चल रही थीं कि जद यू लोक सभा चुनाव में सीटों के बंटवारे पर कड़ा रु ख अपना रही है यानी अगर मनमाफिक सीटें नहीं मिलीं तो जद यू गठबंधन से अलग हो सकती है। नोटबंदी पर नीतीश कुमार के प्रतिकूल बयान का अर्थ भी यही निकाला गया कि वे धीरे-धीरे फिर भाजपा से दूरी बढ़ाने की ओर बढ़ रहे हैं।

कम से कम इस समय तो इसकी संभावना पार्टी ने खत्म कर दी है। हालांकि इसका यह अर्थ नहीं कि भविष्य में कोई समस्या नहीं होगी। बिहार में राजग के अंदर अभी जितने घटक हैं, उनके बीच सीट बंटवारों पर समस्या होनी तय है। जद यू अगर भाजपा के साथ अपने पुराने संबंधों के समय के अनुसार सीटें चाहेगी तो यह पूरा नहीं हो सकता। उस समय भाजपा ने जद यू को प्रदेश में बड़े भाई के रूप में मान लिया था। आज भी विधानसभा में जद यू की सीटें भाजपा से ज्यादा हैं, लेकिन लोक सभा की स्थिति भिन्न है।

उसमें भाजपा सबसे बड़ी पार्टी है। उसके बाद लोजपा है तथा तीसरे नम्बर पर रालोसपा है। जद यू का स्थान गठबंधन में चौथा है। इसमें सीट बंटवारा काफी कठिन हो गया है। नीतीश कुमार ने अपने भाषण में कहा भी कि अभी तय होने दीजिए, अगर हम संतुष्ट हुए तो ठीक, नहीं तो देखेंगे।

यही संतुष्ट होने और देखेंगे में भविष्य की सारी संभावनाएं छिपी हुई हैं। हालांकि नीतीश कुमार के सामने भी समस्या है कि अगर वे सीट बंटवारे से संतुष्ट नहीं हुए तो क्या करेंगे? जिस राजद का साथ उन्होंने छोड़ दिया उसके साथ फिर से जाना आसान नहीं होगा।