चेतावनी संघ की

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने यदि भाजपा को आगामी लोक सभा चुनाव के लिए आगाह किया है तो यह अस्वाभाविक नहीं है। कहा जा रहा है कि पिछले दिनों सूरजकुंड में संपन्न बैठक में संघ ने ऐसे कई बिन्दु उठाए जिनको चुनावी तैयारी में भाजपा को विचार करना होगा। अगर भाजपा के खिलाफ विपक्षी एकता होती है तो इसका असर अवश्य होगा। इसी तरह, मंत्रियों के व्यवहार से भाजपा कार्यकर्ताओं में असंतोष है, यह भी कोई छिपा तथ्य नहीं है। यह रिपोर्ट तो पहले भी आ चुकी है कि अनेक सांसदों के खिलाफ सत्ता विरोधी माहौल है।

इन तीनों प्रतिकूल स्थितियों में भाजपा को विजय पानी है तो उसे अपनी रणनीति उसी अनुसार तय करनी है। जहां तक विपक्षी एकता का प्रश्न है तो केवल उत्तर प्रदेश में ही सपा बसपा के साथ आने से भाजपा को 35 सीटों का नुकसान होने की बात कही गई। यहां से भाजपा ने अपने साथी दल के साथ 73 सीटें जीती थीं। इतनीं सीटें निकल जाने से वह बहुमत के आंकड़े से पीछे हो जाती है। लेकिन भाजपा ने अगले आम चुनाव में 350 से अधिक सीटें जीतने का लक्ष्य तय किया हुआ है।

पिछले चुनाव में भाजपा को 282 सीटों पर विजय मिली और 150 पर वह दूसरे स्थान पर रही। इसके अलावा, 122 ऐसी सीटें हैं, जिन पर भाजपा कभी जीती ही नहीं। जाहिर है यदि उसे 350 का लक्ष्य पाना है तो फिर पुराने स्थानों में ज्यादा से ज्यादा पर पुनर्विजय के साथ नई सीटें जीतनी होंगी। जहां-जहां भाजपा का जनाधार था, वहां वह 2014 में उच्चतम स्थिति में पहुंच चुकी है। तो फिर उसे नए राज्यों में अपने लिए सीटें तलाश करनी है। ऐसे राज्यों को चिह्नित कर नेताओं को चुनावी तैयारियों का जिम्मा दे दिया गया है जिसकी निगरानी स्वयं पार्टी अध्यक्ष अमित शाह करेंगे।

अमित शाह ने पूरे देश का दौरा भी आरंभ कर दिया है। लेकिन जहां सांसदों से नाराजगी है या सरकार से असंतोष है वहां क्या करेंगे? सरकार से असंतोष के निवारण के लिए उपलब्धियों की सूची लेकर नेता-कार्यकर्ता करोड़ों लोगों के पास पहुंच रहे हैं। इसका कुछ असर तो होगा। इसके अलावा, भारी संख्या में वर्तमान सांसदों के टिकट काटे जाने हैं। इस तरह पार्टी अपनी ओर से कोई कसर छोड़ना नहीं चाहती। बावजूद इसके क्या परिणाम भाजपा के पक्ष में वैसा ही आएगा जिसकी वे कल्पना कर रहे है? इसका उत्तर भविष्य के गर्भ में है।