गरीबों की सेवा आधार

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केंन्द्र सरकार उच्चाधिकारियों के मूल्यांकन के प्रारूप में काफी महत्त्वपूर्ण परिवर्तन करने जा रही है। खबरों के अनुसार कार्मिंक मंत्रालय ने मूल्यांकन प्रपत्रों का जो अंतिम मसौदा तैयार किया है, उसमें कई ऐसी बातें हैं, जो अब तक की परंपरा से बिल्कुल अलग है। पहला, उसकी स्वीकृति के बाद सचिव और अतिरिक्त सचिव के स्तर पर शीर्ष आईएएस अधिकारियों का मूल्यांकन जल्द ही समाज के कमजोर वर्ग के प्रति उनके रवैये के आधार पर किया जाएगा। दूसरा, उनकी वार्षिक प्रदर्शन मूल्यांकन रिपोर्ट में समय पर और विशेष रूप से जटिल तथा महत्त्वपूर्ण परिस्थितियों में प्रभावशाली निर्णय लेने की क्षमता का ब्योरा होगा।

और तीसरा, सचिव और अतिरिक्त सचिव स्तर के अधिकारियों का मूल्यांकन वित्तीय निष्ठा और नैतिक निष्ठा दोनों के आधार पर किया जायेगा। इनको साथ मिलाकर विचार करें तो यह देखा जाएगा कि गरीबों के प्रति आपका व्यवहार कैसा रहा है, कठिन स्थितियों में एकदम समय पर आपने कैसा निर्णय किया है और आपके व्यवहार में नैतिकता तथा वित्तीय ईमानदारी का तत्व है या नहीं।

कोई भी इन तीन प्रमुख आधारों को खारिज नहीं कर सकता। कार्मिंक मंत्रालय ने सभी राज्य सरकारों तथा केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखा है और उनसे भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के लिए वार्षिक प्रदशर्न मूल्यांकन फॉर्म में बदलाव के सुझाव मांगे हैं। और जिसका भी सुझाव नहीं आएगा तो मान लिया जाएगा कि उसकी इससे सहमति है। कोई चाहे भी तो खुलकर इस पर आपत्ति प्रकट नहीं कर सकता। अभी तक हमारे देश में नौकरशाहों की जो छवि है उसे देखते हुए माना जा सकता है कि मूल्यांकन के इन आधारों के बाद उनके चरित्र और कार्य व्यवहार में व्यापक परिवर्तन आ जाएगा।

यह शात सत्य है कि सत्ता के वर्तमान ढांचे में भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों पर ही बहुत हद तक देश की नियति निर्भर हैं। नीतियां बनाने से लेकर क्रियान्वयन तक में उनकी अहम भूमिका है। इसलिए राजनीतिक नेतृत्व अधिकारियों के मूल्यांकन का आधार ऐसा बनाएं जिसमें आम आदमी के प्रति उनकी भूमिका तथा देश की वास्तविक सेवा सबसे ऊपर हो। प्रस्तावित परिवर्तन उस लोकसेवक की भावना को चरितार्थ करने वाला है। वैसे यह आम अनुभव है कि अगर अधिकारी दिल से चाहें तो गरीबों के लिए सरकार की जितनी योजनाएं हैं, वह बिल्कुल जमीन तक उतर सकती हैं।