खाली करें बंगले

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सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्रियों को खास सुविधाओं से लैस सरकारी बंगलें आवंटित किये जाने संबंधी कानून को असंवैधानिक घोषित करके संविधान प्रदत्त समता के सिद्धांत की रक्षा की है। शीर्ष अदालत का यह फैसला राजनीतिक वर्ग के लिए एक सबक भी है कि सार्वजनिक संपत्ति का इस्तेमाल व्यक्तिगत संपत्ति के तौर पर नहीं किया जाना चाहिए। इससे संविधान के अनुच्छेद-14 का उल्लंघन होता है, जिसके तहत सभी नागरिकों को समानता का अधिकार प्राप्त है।

सुप्रीम कोर्ट की इस व्याख्या के मुताबिक पद से हटने के बाद मुख्यमंत्री भी आम आदमी के समान ही है, लिहाजा जीवन भर के लिए वे सरकारी बंगलों में नहीं रह सकते। दरअसल, सार्वजनिक संपत्ति का अनधिकार इस्तेमाल भी राजनीतिक भ्रष्टाचार की श्रेणी में आता है और इससे सार्वजनिक जीवन की अपेक्षित शुचिता व नैतिकता भी प्रभावित होती है। अलबत्ता, देश के सभी राजनीतिक दलों का स्वयं आगे आकर सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का समर्थन करना चाहिए और जितने भी पूर्व मुख्यमंत्री इस गैर-संवैधानिक सुविधा का इस्तेमाल कर रहे हैं, उन्हें स्वेच्छा से इसे छोड़ देना चाहिए।

शीर्ष अदालत की अदालत की यह टिप्पणी बहुत महत्त्वूपर्ण है कि उत्तर प्रदेश मंत्रिगण (वेतन, भत्ते, और विविध प्रावधान) कानून 1981 का यह प्रावधान जनसेवक द्वारा पूर्व में सार्वजनिक पद पर रहने के आधार पर सार्वजनिक संपत्ति में लाभ देकर नागरिकों के एक अलग वर्ग का सृजन करने के समान है। दरअसल, राजनीतिक वर्ग का आचरण, व्यवहार और संस्कृति सामंतों की तरह हो गई है,जो आम जनता को प्रजा और स्वयं को प्रजापति यानी शासक वर्ग मानता है।

दरअसल, अगस्त 2016 में एक गैर सरकारी संगठन ‘लोक प्रहरी’ की जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी बंगला आवंटित करने के प्रावधान को निरस्त कर दिया था। लेकिन तब की अखिलेश यादव की सरकार ने उत्तर प्रदेश मंत्रिगण कानून 1981 में संशोधन करके पूर्व मुख्यमंत्रियों के विशेषाधिकार को सुरक्षित कर दिया था।

इस संशोधन को ‘लोक प्रहरी’ ने सर्वोच्च अदालत में चुनौती दी थी। हालांकि यह फैसला उत्तर प्रदेश के संदर्भ में आया है, लेकिन इससे असम और बिहार जैसे राज्य भी प्रभावित हो सकते हैं, जहां पूर्व मुख्यमंत्रियों के लिए भी इसी तरह के विशेष प्रावधान रखे गए हैं। तो बंगलें जितनी जल्दी खाली हो जाएं, उतना ही अच्छा।