खत्म हो दाग

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सर्वोच्च न्यायालय लंबे समय से राजनीति को अपराधियों और भ्रष्टाचारियों से मुक्त करने की दिशा में सक्रिय है। दो अलग-अलग याचिकाओं पर विचार करते हुए उसने अभी जो आदेश दिया है और भविष्य में कुछ आदेश देने का संकेत दिया है, उनको इन्हीं दिशाओं में आगे बढ़ने का कदम माना जाएगा। अपने आदेश में न्यायालय ने केंद्र सरकार से दागी नेताओं से संबंधित मुकदमों की सुनवाई के लिए गठित विशेष न्यायालयों का विस्तृत ब्योरा पेश करने को कहा है। सर्वोच्च न्यायालय ने पिछले वर्ष 14 दिसम्बर को राजनीतिक व्यक्तियों की संलिप्तता वाले मुकदमों की सुनवाई के लिए 12 विशेष न्यायालय गठित करने और इनमें एक मार्च से कामकाज सुनिश्चित करने का निर्देश केंद्र को दिया था। इस पर क्या कार्रवाई की गई इसकी जानकारी देश को नहीं है। हालांकि स्वयं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा था कि जिन नेताओं पर मुकदमे चल रहे हैं, उनका नियत समय में निपटारा हो जाए इसके लिए वह सर्वोच्च न्यायालय से विशेष न्यायालय गठित करने की अपील करेंगे। अब सरकार को यह बताना होगा कि कितने न्यायालय गठित हुए, कितने मुकदमे उनमें स्थानांतरित हुए और उन मुकदमों की स्थिति क्या है? तो केंद्र के जवाब की प्रतीक्षा करनी होगी। इसी तरह, एक अलग याचिका पर सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि वह चुनाव आयोग से कह सकता है कि नेता अपने ऊपर दर्ज मामले का खुलासा करें और उसे सार्वजनिक कर दिया जाए ताकि मतदाताओं को पता चल सके कि किस पार्टी में कितने लोग आरोपित हैं? जैसा हम जानते हैं, चुनाव आयोग ने एक शपथपत्र की व्यवस्था पहले से की हुई है, जिसमें उम्मीदवार अपने ऊपर कायम मुकदमों और उनकी स्थितियों का विवरण देते हैं। जाहिर है, याचिका उसके बाद के कदम के लिए है। यानी अब पार्टियों के सभी नेताओं को अपने ऊपर चल रहे मुकदमों का विवरण देना पड़ सकता है ताकि लोग सच्चाई जानकर उन पार्टियों के बारे में मत बना सकें। पार्टियों में सभी नेता तो चुनाव लड़ते नहीं, लेकिन राजनीति में उनकी भूमिका रहती है, इसलिए ऐसे विवरणों की आवश्यकता है। सर्वोच्च न्यायालय चुनाव आयोग को यह आदेश देने पर भी विचार कर रही है कि वह राजनीतिक दलों को निर्देश दे कि वे गंभीर आपराधिक आरोपों का सामना करने वालों को न तो टिकट दें और न ही ऐसे निर्दलीय उम्मीदवारों से समर्थन लें। अगर ऐसा हुआ तो इसका प्रभाव राजनीति पर निस्संदेह पड़ेगा।