कोढ़ में खाज

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इस बात पर किसी तरह को संशय नहीं है कि आज सोशल मीडिया लोगों की जिंदगी का अहम हिस्सा बन गया है। राजनीतिक पार्टियां इसके प्रमुख प्लेटफॉर्म्स ट्विटर, फेसबुक, व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम आदि के जरिए अपने विचारों का प्रचार-प्रसार कर रही हैं, अपने विरोधियों के विरुद्ध वैचारिक हमले करती हैं। दो हजार चौदह के लोक सभा चुनावों के दौरान लगभग सभी बड़ी राजनीतिक पार्टियों ने इस मंच का बखूबी इस्तेमाल किया था।

लेकिन लोगों ने अपने दांतों तले उंगलियां दबा लीं, जब झारखंड में व्हाट्सएप के जरिए मुकदमा चलाने का एक अनोखा मामला सामने आया। यह मामला हजारीबाग की एक अदालत का है, जहां न्यायाधीश ने व्हाट्सएप कॉल के जरिए आरोप तय करने का आदेश देकर आरोपियों को मुकदमे का सामना करने को कहा। देश की शीर्ष अदालत भी विस्मित रह गई जब उसके सामने यह मामला आया।

सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति एसए बोबड़े और न्यायमूर्ति एलएन राव की पीठ ने अचरज जताते हुए  कहा कि भारत की किसी अदालत में इस तरह के मजाक की कैसे अनुमति दी गई। जाहिर है कि यह न्यायिक प्रक्रिया के साथ खिलवाड़ करने जैसा है। दुनिया के सभी लोकतांत्रिक देशों में न्यायिक प्रक्रिया को स्वतंत्र और निष्पक्ष बनाए रखने का प्रावधान किया गया है। प्राचीन और मध्यकाल में भी न्यायप्रिय शासक ज्यादा लोकप्रिय हुए हैं।

यह बताता है कि हर दौर में नागरिक के जीवन में न्याय का कितना महत्त्व रहा है। जाहिर है कि व्हाट्सएप के जरिए यदि मुकदमा चलाए जाने का प्रचलन शुरू हो गया तो इससे हमारी न्याय व्यवस्था की गंभीरता पूरी तरह से प्रभावित हो जाएगी। सोशल मीडिया सूचना, मनोरंजन और शिक्षा के क्षेत्र में कारगर माध्यम हो सकता है, लेकिन न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा नहीं हो सकता। आज कोई दावे के साथ नहीं कह सकता कि निचली अदालतें भ्रष्टाचार से पूरी तरह मुक्त हैं।

ऐसे में व्हाट्सएप के जरिए मुकदमा चलाया जाना कोढ़ में खाज की तरह होगा। यह मामला झारखंड के पूर्व मंत्री योगेंद्र साव और उनकी पत्नी निर्मला देवी से संबंधित है। ये दोनों दो हजार सोलह के दंगा मामले में आरोपी हैं। सुप्रीम कोर्ट ने हजारीबाग की निचली अदालत की इस प्रक्रिया पर रोक लगाकर न्याय प्रशासन को होने वाली बदनामी से बचा लिया है।

उम्मीद की जानी चाहिए कि इस मामले में शीर्ष अदालत के कड़े रुख के बाद निचली अदालतें भविष्य में न्यायिक प्रक्रिया के साथ इस तरह का अगंभीर रवैया अपनाने से बाज आएंगी।