किसानों पर मेहरबानी

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नरेन्द्र मोदी सरकार ने किसानों की फसल की खरीद के लिए जिस प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान यानी पीएम-आशा की घोषणा की है, उसका स्वागत किया जाना चाहिए। मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृत यह योजना फसलों का लाभकारी मूल्य दिलाकर किसानों की आय दोगुनी करने के वादे को पूरा करने की दिशा में उठाया गया एक महत्त्वपूर्ण कदम ह

फसलों की लागत का डेढ़ गुणा मूल्य प्रदान करने की मंजूरी के बाद यह दूसरा बड़ा निर्णय है। सरकार द्वारा इसके लिए 16550 करोड़ की बैंक गारंटी का प्रावधान करना साबित करता है कि यह केवल घोषणा मात्र नहीं है। इस योजना में किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य देने की गारंटी है। यदि किसान को न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम की दर मिलती है तो उसकी भरपाई सरकार करेगी। किसान कल्याण मंत्री राधामोहन सिंह ने साफ किया है कि इस नई योजना के तहत पहले से चल रही मूल्य समर्थन योजना, मूल्य अंतर भुगतान योजना (भावान्तर) और निजी खरीद एवं भंडारण को पायलट योजना के रूप में शामिल किया गया है।

पहली योजना तो पहले से है। दूसरी योजना मध्य प्रदेश से आरंभ हुई, जिसे देश भर में विस्तारित किया गया है। तीसरी योजना की तो ज्यादा आवश्यकता है। वास्तव में इसके तहत निजी क्षेत्र भी न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद करे इसे प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से कुछ राज्यों के चुनिंदा जिलों के पायलट योजना स्वीकृत कर दिया गया है। इस योजना के तहत अधिसूचित समय के दौरान अधिसूचित बाजार में निबंधित किसानों से चुनी गई निजी एजेंसी न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसल की खरीद कर सकेगी। इसमें तिलहनों की खरीद महत्त्वपूर्ण है। इससे तिलहन उत्पादन को प्रोत्साहन मिल सकता है।

लेकिन मूल बात है योजना का उसकी कल्पना के अनुरूप जमीन पर उतरना। बगैर निजी क्षेत्र के सरकारों द्वारा बिकने योग्य पैदा हुई फसलों को पूरी तरह खरीद पाना संभव ही नहीं है। इसमें राज्य सरकारों की भूमिका ज्यादा अहम है। केंद्र की इसमें भूमिका कम है। अगर किसी किसान को न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम की दर मिलती है तो उसकी भरपाई करने की बात योजना में हो, लेकिन इसके लिए चौकसी की जरूरत है।

इसका लाभ किसानों को मिलना चाहिए। अच्छा हो कि केंद्र सरकार किसानों को सही भुगतान सुनिश्चित करने के लिए राज्यों की बैठक आयोजित करे। इससे वातावरण बनेगा और बिचौलियों पर नकेल कसी जा सकेगी।