कार्यकारिणी का संदेश

,

भाजपा की राजधानी दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी में जो स्वर गूंजे वे स्वाभाविक थे। सामने 2019 में लोक सभा चुनाव है और उसके पहले भाजपा की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण तीन राज्यों के विधानसभा चुनाव। जाहिर है, कार्यकारिणी का मुख्य फोकस यही होना था। सबसे महत्त्वपूर्ण निर्णय लोक सभा चुनाव तक संगठनात्मक चुनाव टालना रहा।

इसका अर्थ होगा कि अमित शाह तब तक अध्यक्ष पद पर कायम रहेंगे। यही अपेक्षा भी थी। शाह को चुनाव का श्रेष्ठ रणनीतिकार माना जाता है और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ उनकी जोड़ी पार्टी के लिए अभी तक लाभकारी रही है। मोदी चुनाव में मुख्य चेहरा होंगे, इस बारे में कोई निर्णय नहीं होता तो भी फर्क नहीं पड़ने वाला था, क्योंकि अभी उनके अलावा कोई हो ही नहीं सकता। नेता के बाद होती है रणनीति। इसमें भी कोई नई बात नहीं है। मसलन, कार्यकर्ता सरकार के कामों को जनता तक पहुंचाएं, आर्थिक तथ्यों के आधार पर विकास पर प्रश्न उठाने वालों को जवाब दे, संभावित महागठबंधन का सच लोगों को बताएं..आदि।

ये सारी बातें हमारे सामने पहले से थीं। कार्यकारिणी में औपचारिक रूप से आ जाने के बाद यह अब स्पष्ट रणनीति हो गई है। यानी मोदी का नाम, सरकार का कामकाज, कांग्रेस और विपक्षियों पर हमला। अमित शाह ने कहा भी कि संगठन और सरकार के काम की बदौलत अगला चुनाव 2014 से ज्यादा बहुमत से जीतेंगे। पता नहीं क्या होगा, पर उनके भाषण से भाजपा को एक नारा मिल गया है जो चुनाव तक चलेगा।

उन्होंने कहा कि भाजपा ‘मेकिंग इंडिया पार्टी’ है और कांग्रेस ‘ब्रेकिंग इंडिया’। ऐसा नहीं है कि एजेंडा से हिन्दुत्व बिल्कुल खत्म हो गया है। शाह ने ही अपने भाषण में कहा कि हम इस तरह से राष्ट्रीय नागरिक पंजीकरण का कार्यान्वयन करेंगे कि एक भी नया घुसपैठिया भारत में नहीं आ सकेगा। लेकिन हिन्दु, सिख, जैन, बौद्ध, ईसाइयों को शरण दी जाएगी।

यह वह मुद्दा है, जिस पर भाजपा कार्यकर्ता एवं समर्थक पार्टी नेतृत्व एवं सरकार से स्पष्ट मत चाहते थे। यह उनको मिल गया है। हालांकि पार्टी के इस मत से सहमत होना जरा कठिन है कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति से जुड़े मसले पर भ्रम फैलाने का काम किया जा रहा है। संभव है विपक्ष इस मामले में नेपथ्य में हो पर इतने बड़े वर्ग के गुस्से को केवल भ्रम फैलाने का परिणाम नहीं माना जा सकता। वास्तव में पार्टी द्वारा इसे गंभीरता से लिये जाने की उम्मीद थी।