कश्मीर में आलआउट

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एक दिन में 12 आतंकवादियों को मारकर भारतीय सुरक्षा बलों ने घाटी खासकर दक्षिण कश्मीर में सक्रिय आतंकी संगठनों हिजबुल मुजाहिदीन और लश्कर-ए-तैयबा की कमर तोड़ दी है। यह पिछले सात सालों में घाटी में आतंकवादियों के खिलाफ सुरक्षा बलों का सबसे व्यापक और आक्रामक ऑपरेशन चलाया गया।

दक्षिण कश्मीर ही राज्य का वह इलाका है, जहां सबसे ज्यादा आतंकी वारदातों को अंजाम दिया गया है। पिछले साल मई में सेना और अर्ध सैनिक बलों ने शोपियां, अनंतनाग, कुलगाम और पुलवामा में 8 घंटे का सर्च ऑपरेशन चलाया था।

करीब 3 हजार जवानों ने 20 गांवों को घेर कर आतंकवादियों की खोजबीन की थी। खुफिया रिपोर्टों के मुताबिक दक्षिण कश्मीर आतंकवादियों के नये गढ़ के रूप में उभरा है। यहां के कुछ बाशिंदे आतंकवादियों को हर तरह का सुरक्षा कवच उपलब्ध कराते हैं। यहां तक कि सुरक्षा बलों की गश्त और ऑपरेशन के दौरान आतंकियों की ढाल बनकर सामने आ जाते हैं और पत्थरबाजी शुरू कर देते हैं।

रविवार को हुई मुठभेड़ में भी आतंकवादियों को भगाने के लिए स्थानीय निवासी आगे आए और उनमें से चार मारे गए। कुल मिलाकर 12 आतंकवादियों को एक साथ ढेर करना सेना की बड़ी कामयाबी है और इससे घाटी में अमन बहाली का माहौल तैयार होगा। लेकिन जो खबरें सेना के लिए चिंताजनक है, वो है 12 में से 11 आतंकवादियों का स्थानीय होना।

कई आतंकवादी तो साल भर पहले ही आतंकवादी संगठनों में शामिल हुए थे। खासकर जून 2016 में बुरहान वानी के मारे जाने के बाद बड़े पैमाने पर राज्य के युवा आतंकवाद की ओर आकषिर्त हुए। अपनी इस नाकामी पर सरकार को मंथन करने की जरूरत है।

युवाओं को साजिश का हिस्सा बनने नहीं देना ही शांति की दिशा में बड़ा कदम माना जाएगा। नि:संदेह सेना के इस आक्रामक रुख से आतंकवादी संगठन, अलगाववादी संगठन और पाकिस्तान सकते में है। इनके 12 साथियों का मारा जाना इस लिहाज से महत्त्वपूर्ण है कि हाल के महीनों में पाकिस्तान ने सीमा पर गोलीबारी से माहौल को तनावपूर्ण बना रखा था। करारी मार से उम्मीद की जानी चाहिए कि दहशतगर्द शांत रहेंगे।