कर्नाटक: येदियुरप्पा ने ली मुख्यमंत्री पद की शपथ

आईएएनस/वार्ता, बेंगलुरु

कर्नाटक में भाजपा विधायक दल के नेता बीएस येदियुरप्पा ने गुरुवार को राज्य के 25वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। राज्यपाल वजुभाई वाला ने सुबह नौ बजे राजभवन में कड़ी सुरक्षा और व्यवस्था के बीच येदियुरप्पा को शपथ दिलाई।

मंत्रिमंडल के अन्य सदस्यों का शपथ ग्रहण कार्यक्रम बाद में होगा।

येदियुरप्पा (75) ने भाजपा के केंद्रीय और राज्य के नेताओं और नवनिर्वाचित विधायकों के बीच कन्नड़ भाषा में शपथ ली।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह इस शपथ ग्रहण समारोह में शामिल नहीं हुए।

वह तीसरी बार मुख्यमंत्री पद की कमान संभाल रहे हैं। कर्नाटक के बड़े लिंगायत नेता येद्दियुरप्पा आठवीं बार शिकारीपुरा से विधायक चुने गए हैं। वह 2014 में शिमोगा से लोकसभा सांसद बने थे। वह 2007 में पहली बार सात दिनों के लिए मुख्यमंत्री बने थे और 30 मई 2008 को दूसरी बार मुख्यमंत्री का पदभार संभाला था लेकिन जुलाई 2011 में भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते उन्होंने इस्तीफा दिया था।

गौरतलब है कि येद्दियुरप्पा को सरकार बनाने के लिए कल राज्यपाल वजूभाई वाला ने आमंत्रित किया था जिसके खिलाफ कांग्रेस और जेडीएस ने रात उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। न्यायमूर्ति अर्जन कुमार सिकरी, न्यायमूर्ति एसए बोबडे और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की पीठ ने रात सवा दो बजे से सुबह साढ़े पांच बजे तक चली सुनवाई के बाद कहा कि वह राज्यपाल के आदेश पर रोक लगाने के पक्ष में नहीं है, इसलिए येद्दियुरप्पा के शपथ-ग्रहण समारोह पर रोक नहीं लगायेगी।
न्यायालय ने हालांकि यह स्पष्ट किया कि उनका मुख्यमंत्री पद पर बने रहना इस मामले के अंतिम निर्णय पर निर्भर करेगा।

शीर्ष अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए शुक्रवार साढ़े 10 बजे का समय निर्धारित किया, साथ ही भाजपा को नोटिस जारी करके उन दो पत्रों की प्रति अदालत के समक्ष जमा कराने को कहा है, जो उसकी ओर से राज्यपाल को भेजे गये थे।
राज्य की 224 सदस्यीय विधानसभा के लिए 222 सीटों पर चुनाव हुए थे। जयनगर निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा उम्मीदवार का निधन हो जाने और राजराजेश्वरी नगर निर्वाचन क्षेत्र में भारी संख्या में मतदाता पहचान पत्र बरामद किये जाने के कारण चुनाव रद्द कर दिया गया। इन दोनों सीटों के लिए अब 28 मई को मतदान होगा।

इन चुनावों में भाजपा को 104, कांग्रेस को 78, जेडीएस को 37, बसपा को एक और निर्दलीय को दो सीटों पर विजय हासिल हुई। भाजपा सबसे अधिक सीटें जीत कर सबसे बड़ी एकल पार्टी के रूप में सामने आयी लेकिन कांग्रेस और जेडीएस ने हाथ मिलाकर सरकार बनाने का दावा पेश किया था। राज्यपाल ने सबसे बड़ी एकल पार्टी के तौर पर भाजपा को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया था और उन्हें बहुमत साबित करने के लिए 15 दिनों का समय दिया है।