कर्नाटक मामला : ..तो क्या खरीद-फरोख्त को दी जा सकती है मंजूरी

विवेक वार्ष्णेय/सहारा न्यूज ब्यूरो, नई दिल्ली

कर्नाटक में राजनीतिक घटनाक्रम पर टिप्पणी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने विधायकों की खरीद-फरोख्त और दल-बदल कानून को विशेष रूप से रेखांकित किया। जब अटार्नी जनरल ने कहा कि विधायकों के शपथ लेने से पूर्व दल-बदल कानून उन पर लागू नहीं होता तो बेंच ने टिप्पणी की कि क्या उससे पहले खरीद-फरोख्त को मंजूरी दी जा सकती है।

जस्टिस सीकरी की अध्यक्षता वाली बेंच इस बात से वाकिफ थी कि बहुमत के आंकड़े से दूर भाजपा शक्ति परीक्षण के दौरान अन्य दलों के विधायकों को तोड़ सकती है। इसी पृष्ठभूमि में बेंच ने कहा कि विधायक जिस राजनीतिक दल के चुनाव चिन्ह से जीतकर आए हैं, यदि वह अपनी निष्ठा बदलते हैं तो उन पर दल-बदल कानून लागू होगा। अदालत का इशारा नवनिर्वाचित विधायकों की सदस्यता को लेकर था। दल-बदल कानून लागू होने से विधान सभा की सदस्यता समाप्त हो सकती है।

याचियों के वकील सिंघवी ने कहा कि विधायकों की संख्या से ही बहुमत साबित होता है। कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन 116 विधायकों के समर्थन का पत्र राज्यपाल को दे चुका है। भाजपा के पास सिर्फ 104 विधायक हैं। सिर्फ दो विधायक निर्दलीय हैं। यदि उन्हें भी मिला लिया जाए तो भी भाजपा को बहुमत हासिल नहीं होता। केवल विधायकों की खरीद-फरोख्त से ही भाजपा बहुमत हासिल करती है। यदि ऐसा हुआ तो लोकतंत्र के लिए यह घातक होगा।

पुरानी परम्परा है कि चुनाव के बाद बहुमत पाए दल को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया जाता है। यदि किसी एक दल ने बहुमत हासिल नहीं किया तो प्रथम विकल्प के रूप में चुनाव से पूर्व हुए गठबंधन को सरकार बनाने का न्यौता दिया जाता है। चुनाव पूर्व गठबंधन के अभाव में चुनाव के बाद हुए गठबंधन को वरीयता दी जाती है। जब यह भी संभव नहीं होता तो अंतिम विकल्प के रूप में सबसे बड़े दल को बुलाया जाता है जिसके पास सबसे ज्यादा विधायक हो। राज्यपाल ने तीसरा विकल्प छोड़कर चौथे को चुना जो गलत है।

भाजपा के तीन विधायकों की ओर से पेश हुए वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि राज्यपाल के आदेश पर स्थगनादेश नहीं दिया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट का अधिकार है कि वह गलत तरीके से गठित सरकार को हटा दे। उन्होंने अरुणाचल प्रदेश और उत्तराखंड सरकार को बर्खास्त करने के एनडीए सरकार के फैसले का उदाहरण दिया जहां सुप्रीम कोर्ट ने गलत तरीके से हटाई गई सरकारों को बहाल कर दिया।