कर्नाटक जनादेश के निहितार्थ

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दो हजार उन्नीस के लोक सभा चुनाव को प्रभावित करने की दृष्टि से निर्णायक माना जाने वाले कर्नाटक विधानसभा के चुनाव में किसी भी राजनीतिक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने का अर्थ भाजपा और कांग्रेस, दोनों को समझ लेना चाहिए। भाजपा के लिए संदेश है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का मैजिक बरकरार है। लेकिन भाजपा के लिए सबसे अहम सवाल है कि छोटे-छोटे क्षेत्रीय दल उसके विरुद्ध एकजुट होते हैं, तो उनका मुकाबला वह कैसे करेगी। दो हजार चौदह के लोक सभा चुनाव के पहले भाजपा एक मजबूत गठबंधन बनाने में सफल रही थी, लेकिन अपने दम पर बहुमत पाने के बाद पार्टी के क्षेत्रीय और राष्ट्रीय नेताओं का अहंकार आसमान छू रहा है। यही वजह है कि भाजपा की सबसे पुरानी सहयोगी शिवसेना ने आगामी लोक सभा चुनाव में अलग राह पकड़ने की घोषणा कर दी है। तेलुगू देशम भी एनडीए से अलग हो गई है।

हालांकि कर्नाटक में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरी है, और बहुमत से मात्र आठ सीटें पीछे रह गई है। इसके पहले वह कई राज्यों में सरकार बनाने में सफल रही है। पार्टी के नेता और कार्यकर्ता, दोनों उत्साहित हैं। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह किसी भी राज्य में चुनाव से काफी पहले वहां जाकर कार्यकर्ताओं को उत्साहित करते हैं। अलबत्ता, आगामी लोक सभा चुनाव में भाजपा सांगठनिक दृष्टि से अपने आप को सुगठित और चुनाव जीतने वाली पार्टी के रूप में प्रस्तुत करेगी। सहयोगी दलों की परवाह किए बगैर ‘एकला चलो’ की नीति पर आगे बढ़ेगी।

उसकी यह रणनीति उसके लिए आत्मघाती साबित हो सकती है। इसलिए उसे श्रेष्ठता वाली छवि को त्याग कर अपने सहयोगी दलों को साथ लेकर चलने का प्रयास करना चाहिए क्योंकि कर्नाटक में कांग्रेस सिद्धारमैया के मोह से मुक्त होकर जेडीएस के साथ चुनाव-पूर्व गठबंधन कर लेती तो भाजपा का सूपड़ा साफ हो जाता। वहां पार्टियों को मिले मतों का प्रतिशत बताता है कि अगर दो हजार उन्नीस का लोक सभा चुनाव कांग्रेस-जेडीएस मिलकर लड़ेंगे तो भाजपा को मात्र छह सीटें मिल पाएंगी।

दूसरी ओर, कर्नाटक चुनाव कांग्रेस को भी सबक सिखा रहा है कि मोदी-अमित की जोड़ी से कैसे टक्कर लेगी क्योंकि इस चुनाव ने भी साबित कर दिया है कि सघन और आक्रामक चुनाव प्रचार करने के बावजूद राहुल गांधी मतदाताओं को आकषिर्त करने में सफल रहे हैं। अब देखना है कि भाजपा और कांग्रेस कर्नाटक चुनाव नतीजों की व्याख्या कैसे करती हैं।