कर्नाटक चुनाव : भाजपा ने 82 उम्मीदवारों की दूसरी सूची जारी की

आईएएनएस, नई दिल्ली

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने सोमवार को 224 सदस्यीय कर्नाटक विधानसभा चुनाव के लिए जी.सोमशेखर रेड्डी समेत 82 उम्मीदवारों की दूसरी सूची जारी कर दी है। सोमशेखर रेड्डी खनन उद्योगपति जी.जनार्दन रेड्डी के छोटे भाई हैं। दूसरी सूची में अन्य प्रमुख उम्मीदवार हैं- पूर्व भाजपा मंत्री मर्गेश नीरानी, हर्तालू हलप्पा, एम.पी. रेणुकाचार्य, कृष्णया शेट्टी, के.सुब्रमण्य नायडू और कुमार बंगारप्पा, जो सत्तारूढ़ कांग्रेस छोड़कर भाजपा से जुड़े थे और पूर्व मुख्यमंत्री एस.बंगारप्पा के पुत्र हैं।

पार्टी अध्यक्ष अमित शाह की अध्यक्षता वाली केंद्रीय चुनाव समिति ने नामों पर अंतिम मुहर लगाई। समिति में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री राजनाथ सिंह, वित्तमंत्री अरुण जेटली, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा समेत अन्य सदस्य शामिल हैं।

भाजपा ने आठ अप्रैल को 72 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की थी।

भाजपा के राज्य प्रवक्ता एस.शांताराम ने बेंगलुरु में आईएएनएस को बताया, "70 उम्मीदवारों की तीसरी सूची 2-3 दिनों में जारी की जाएगी क्योंकि उनकी जीत की संभावनाओं का मूल्यांकन किया जा रहा है।"

शांताराम ने कहा, "उम्मीदवारों को उनकी जीत की योग्यता के आधार पर चुना जाता है इसलिए पार्टी ने जाति, लिंग और अन्य कारकों पर विचार नहीं किया।"

उन्होंने उम्मीद जताई की तीसरी सूची में कुछ महिलओं के भी नाम होंगे। 2013 विधानसभा चुनाव में पार्टी ने आठ महिला उम्मीदवारों को उतारा था जिसमें से शशिकला जोले और निप्पानी ने जीत दर्ज की थी।

उन्होंने कहा, "भाजपा के सभी 40 विधायकों को फिर से चुनाव लड़ने के लिए नामित किया गया है। उनको भी जो 2013 के चुनावों में हार गए थे।"

भाजपा ने 10 विधायकों के नामों को भी मंजूरी दी जिनमें से छह सदस्य कर्नाटक जनता पार्टी (केजेपी) और चार बीएसआर कांग्रेस के जो दोबारा भाजपा में शामिल हुए हैं।

पार्टी के मुख्यमंत्री का चेहरा बने बी.एस.येदियुरप्पा, 2012 में भाजपा से अलग हो गए थे और 2013 के चुनावों से पहले केजेपी का गठन किया था। वह जनवरी 2014 में दोबारा पार्टी में शामिल हो गए थे और मालंद इलाके के शिवमोगा से लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए थे।

शांताराम ने कहा, "पिछले चुनावों में हमारे अधिकांश उम्मीदवार हार गए, क्योंकि हमारे पारंपरिक वोटों का भाजपा और केजेपी के बीच विभाजन हो गया था जिससे कांग्रेस को फायदा हुआ।"