कठुआ गैंगरेप: आरोपियों ने खुद को बताया बेकसूर, की नारको टेस्ट की मांग

वार्ता , नयी दिल्ली

कठुआ में एक बच्ची के साथ बलात्कार कर उसकी हत्या के मामले में आरोपी आठ लोगों ने आज खुद को बेकसूर बताते हुए जिला और सत्र न्यायाधीश से नारको टेस्ट कराने का अनुरोध किया।          

मामले के आठ में से सात आरोपियों को जिला और सत्र न्यायाधीश संजय गुप्ता की अदालत के समक्ष पेश किया गया जिन्होंने राज्य अपराध शाखा से उन्हें आरोप पत्र की प्रतियां देने को कहा और मामले में सुनवाई की अगली तारीख 28 अप्रैल तय की।           

मामले में आठवां आरोपी नाबालिग है जिसने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष जमानत के लिये अर्जी दायर की है। इस पर 26 अप्रैल को सुनवाई होगी।        

अल्पसंख्यक घुमंतू समुदाय की एक बच्ची का कथित तौर पर अपहरण कर उसे कठुआ जिले के एक गांव के एक छोटे से मंदिर में करीब एक सप्ताह तक रखा गया। इस दौरान उसे बेहोश रखा गया और हत्या करने से पहले उसका यौन उत्पीड़न किया गया। मामला इस साल जनवरी का है।              

अपराध शाखा द्वारा दायर आरोप पत्र के अनुसार, बच्ची का अपहरण, बलात्कार और हत्या अल्पसंख्यक घुमंतू समुदाय को क्षेत्र से हटाने के लिए रची गई एक सोची समझी साजिश थी। नाबालिग के लिये एक अलग आरोप पत्र दायर किया गया है।    

आरोपियों के वकील ने अपराध शाखा द्वारा नौ अप्रैल को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष दायर आरोप पत्र की प्रति मांगी है।               

सत्र न्यायालय में संक्षिप्त सुनवाई के बाद सातों आरोपियों को कड़ी सुरक्षा के बीच जेल में स्थानांतरित कर दिया गया।               

बच्ची से कथित तौर पर बार-बार दुष्कर्म के आरोपी विशेष पुलिस अधिकारी दीपक खजूरिया ने पुलिस वैन से संवाददाताओं को बताया कि वह नारको परीक्षण और सीबीआई जांच की मांग कर रहा है।               

जैसे ही अदालत के अंदर सुनवाई शुरू हुई, राम की बेटी मधु शर्मा ने बाहर प्रदर्शन शुरू कर दिया और मामले में सीबीआई जांच की मांग की।               

कठुआ अदालत परिसर में नौ अप्रैल को हुये तनाव के मद्देनजर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किये गए थे। नौ अप्रैल को यहां स्थानीय बार असोसिएशन ने अपराध शाखा को कथित तौर पर आरोप-पत्र दायर नहीं करने दिया था।                    

कठुआ में एक गांव के ‘देवीस्थान’ की देखरेख करने वाले संजी राम को इस अपराध के पीछे मुख्य साजिशकर्ता बताया गया है।               

इस अपराध में विशेष पुलिस अधिकारी दीपक खजूरिया और सुरेंद्र वर्मा, दोस्त प्रवेश कुमार ऊर्फ मन्नू, राम का भतीजा, एक नाबालिग और उसका बेटा विशाल जंगोत्रा ऊर्फ ‘शम्मा’ कथित तौर पर शामिल थे।               

आरोप पत्र में जांच अधिकारी हेड कांस्टेबल तिलक राज और उप निरीक्षक आनंद दत्ता का भी नाम है जिन्होंने कथित तौर पर राम से चार लाख रूपये लिये और अहम साक्ष्य नष्ट किये।               

आरोपियों को चालान या आरोप पत्र की प्रतियां मुहैया कराने का मुद्दा वकील अंकुश शर्मा की तरफ से न्यायाधीश के समक्ष उठाया गया। वह अदालत में संजीराम, उसके बेटे और अन्य का पक्ष रख रहे हैं।               

उन्होंने कहा कि आरोप पत्र अदालत में नौ अप्रैल को दायर किया गया था लेकिन उसकी प्रति अब तक उन्हें मुहैया नहीं कराई गई है।           

राम ने न्यायाधीश से कहा कि वह नारको टेस्ट चाहते हैं और उसके लिये तैयार हैं।               

न्यायाधीश ने आरोपियों से पूछा कि क्या उन्हें आरोप पत्र की प्रतियां दी गई हैं, जो 400 पन्नों की हैं।               

आरोपी तिलक राज का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील ए के साहनी ने संवाददाताओं से कहा कि जम्मू कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती फास्ट ट्रैक सुनवाई की बात कर रही हैं लेकिन आरोप पत्र की प्रति उन्हें अब तक मुहैया नहीं कराई गई है।             
    
 भाषा कठुआ (जम्मू-कश्मीर)