कई सालो से भटक रहे है अश्वत्थामा, यहां रोज शिवलिंग पर चढ़ाते है फूल

वार्ता, देवरिया

उत्तर प्रदेश में देवरिया जिले के मझौलीराज के निकट हिरण्यावती नदी के तट पर स्थित पौराणिक दीर्घेश्वरनाथ मंदिर में मान्यता है कि यहां महाभारत काल के चिरंजीवी योध्दा अश्वत्थामा आज भी पूजा दर्शन के लिये आते हैं।
      
मंदिर में वैसे तो वर्षभर भक्तों का जमावाड़ा लगा रहता है, लेकिन श्रावण मास, शिवरात्रि और अधिक मास में मन्नत पूरी होने की आशा लेकर आने वाले श्रद्धालुओं का हर दिन तांता लगा रहता है। मंदिर के बारे में मान्यता है कि यहां शिवलिंग स्वयंभू है और श्रावण मास में यहां एक महीने मेला  जैसा रहता है।
      
मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से यहां अपनी मन्नत मांगता है, वह पूरी जरूर होती है। यहां पूजा-अर्चना करने वाले की मन्नत पूरी होने के साथ ही उसकी उम्र भी लंबी हो जाती है तथा उसकी अकाल मृत्यु नहीं होती है।
     
किवदंतियों के अनुसार यहां प्रतिदिन अश्वत्थामा पूजा-अर्चना करने आते हैं। मंदिर के महंत जगन्नाथ दास ने बताया कि मस्तक के घाव के कारण अत्थामा आज भी तड़पते और इधर-उधर भटकते हैं। भगवान शिव द्वारा भक्तों को दीर्घायु का आशीर्वाद दिए जाने के कारण इस मंदिर को दीर्घेश्वरना महादेव  के नाम से जाना जाता है।
      
स्थानीय लोगों का कहना है कि अश्वत्थामा इस मंदिर में रात के तीसरे पहर में आते हैं तथा भगवान शिव की पूजा करके चले जाते हैं। सुबह जब मंदिर का द्वार खोला जाता है तो यहां पर सारी पूजन-सामग्री शिवलिंग पर चढ़ी मिलती है।