ऐतिहासिक कदम

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उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन की दक्षिण कोरिया यात्रा के बाद जो बदला चरित्र सामने आ रहा है, वह कई लोगों को हैरत में डाल रहा है। लेकिन विश्व शांति की दृष्टि से इसका स्वागत किया जाना चाहिए।

एक नेता, जो अपने नाभिकीय विस्फोटों और मिसाइल परीक्षणों से दुनिया भर में आशंकाएं पैदा कर रहा था, पड़ोसी देशों से लेकर अमेरिका तक को परेशान किए हुए था, उसमें अचानक इतना बदलाव आ जाएगा यह कल्पना कोई नहीं कर सकता था। द. कोरिया से जो जानकारी आई है, उसके अनुसार राष्ट्रपति मून जेई-इन से बातचीत में किम ने मई में देश के परमाणु परीक्षण स्थल को बंद करने का वादा किया है।

अगर उ. कोरिया वाकई इसके लिए मन बना चुका है तो यह मान लीजिए कि केवल क्षेत्र के लिए नहीं पूरी दुनिया के लिए यह बहुत बड़ा परिवर्तन होगा। यही नहीं किम जोंग उन ने जल्द ही दक्षिण कोरियाई और अमेरिकी विशेषज्ञों को पत्रकारों के साथ अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने इस प्रक्रिया का खुलासा पारदर्शिता के साथ करने के लिए बुलाने का भी वायदा किया है। हालांकि किम जोंग उन के अब तक के रवैये को देखते हुए कुछ लोग कह सकते हैं कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के साथ बैठक के पूर्व वह दुनिया भर से अपने प्रति सहानुभूति पाने की रणनीति पर चल रहा है। अभी हम निश्चयात्मक तौर पर कुछ नहीं कह सकते।

किंतु दक्षिण कोरिया में किम जोंग का एकदम बदला हुआ रूप हमने देखा है। अगर वह कह रहा है कि अमेरिका हमारे बारे में अप्रिय सोच रखता है, लेकिन एक बार हम बात शुरू करेंगे तब अमेरिका यह जानेगा कि मैं ऐसा शख्स नहीं हूं, जो दक्षिण कोरिया, प्रशांत क्षेत्र या अमेरिका पर नाभिकीय हथियार छोड़ूंगा तो इसे खारिज करना भी ठीक नहीं। किम ने मून से यह भी कहा कि हम अगर अक्सर (अमेरिका के साथ) बैठक करते हैं और विश्वासपूर्ण संबंध बनाते हैं, युद्ध खत्म करते हैं और आक्रमण नहीं करने का वादा करते हैं तो हम नाभिकीय हथियारों के साथ क्यों रहेंगे? किंतु इसमें यह शर्त भी है उत्तर कोरिया को भी यह भरोसा होना चाहिए कोई उस पर आक्रमण नहीं करेगा।

जाहिर है, अमेरिका के साथ दक्षिण कोरिया व जापान को भी आगे आकर किम के इस बदले रवैये को बल देना चाहिए। किम में आए इस बदलाव को जाया नहीं होने देना चाहिए।