एफ -18 और एम्फीबियन विमानों का भारत में निर्माण का रास्ता साफ

कांचीपुरम् से लौटकर संजय सिंह/सहारा न्यूज ब्यूरो, नई दिल्ली

भारत में मेक इन इंडिया के तहत विदेशी हथियारों, लड़ाकू विमानों और सैन्य साजोसामान के भारतीय कम्पनियों के साथ साझा निर्माण का रास्ता इस बार के डिफेंस एक्सपो में और भी सुगम हुआ। दुनिया की नामचीन विमान निर्माता एवं अन्य रक्षा उत्पाद कंपनियों के साथ भारतीय पब्लिक सेक्टर और निजी रक्षा कंपनियों ने दर्जनभर से अधिक एमओयू (मेमोरेन्डम ऑफ अंडरस्टैन्डिंग) पर हस्ताक्षर किए। इनमें सबसे महत्वपूर्ण एमओयू अमेरिकी एफए-18 सुपर हान्रेट लड़ाकू विमान के भारत में निर्माण के लिए इसकी निर्माता कंपनी बोइंग का भारतीय सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी हिन्दुस्तान एयरोनाटिक लि. (एचएएल) और निजी क्षेत्र की कम्पनी महिन्द्रा डिफेंस सिस्टम के साथ हुआ। यह तीनों कम्पनियां मिलकर इस विमान की नई पीढ़ी का साझा उत्पादन करेंगी, जो एक तरह से आर्ट आफ स्टेट होगा।

कांचीपुरम् (तमिलनाडु) जिले के थिरुविदान्थाई  में चार दिनों तक चले डिफेंस एक्सपो-2018 में दूसरा सबसे शानदार एमओयू जापानी कंपनी शिनमाया का भारतीय कम्पनी महिन्द्रा डिफेंस के साथ यूएस-2 एम्फीबियन विमान के भारत में निर्माण को लेकर हुआ। दोनों मिलकर अब इस विमान का उत्पादन यहां करेंगे। इस विमान को जमीन पर और बेहद कठिन समुद्री अभियानों के दौरान भी इस्तेमाल किया जा सकता है। यह समुद्र की तीन मीटर ऊंची उठती लहरों के बीच भी ऑपरेशन को अंजाम दे सकता है। इसके अलावा यह किसी झील या नदी में भी लैंडिंग और टेक ऑफ करने में सक्षम है। इसके अलावा महिंद्रा की ओर से इन एयरक्राफ्ट्स की मेंटनेंस, रिपेयर और ओवरहॉलिंग के लिए यूनिट्स भी स्थापित की जाएंगी।

जापानी कंपनी के साथ टाइ-अप को लेकर महिंद्रा ग्रुप के एयरोस्पेस ऐंड डिफेंस सेक्टर के प्रेजिडेंट एसपी शुक्ला ने कहा, ‘एविएशन के बिजनेस से जुड़ी दो कंपनियों के बीच साझेदारी होना सकारात्मक है।‘ शिनमाया इंडस्ट्रीज के डायरेक्टर यासुओ कावानिशी ने कहा, यह विशेष तरह का एयरक्राफ्ट है, जो भारत की स्थितियों के लिए अनुकूल है। समुद्री सुरक्षा मजबूत करने के लिए यूएस-2 काफी उपयोगी साबित होगा। यह जमीन से पानी में और पानी से जमीन में उड़ान भरने में सक्षम है।‘ हिंद महासागर में भारत जैसी अहम शक्ति के लिए यह खासा उपयोगी होगा। जापान की मैरीटाइम डिफेंस फोर्स इसे बीते कई सालों से इस्तेमाल कर रही है। महिंद्रा डिफेंस ने इस्रइली कंपनी एयरोनॉटिक्स के साथ भी एक एमओयू साइन किया है। इसके तहत भारतीय नौसना के लिए शिपबोर्न मानवरहित एयरक्राफ्ट्स (यूएवी) को तैयार करने का समझौता हुआ है। इस्रइली कंपनी एयरोनॉटिक्स को दुनिया भर में यूएवी की मैन्युफैक्चरिंग करने वाली टॉप कंपनियों में से एक माना जाता है। इस्रइल की यह पब्लिक लिस्टेड कंपनी दुनिया के तमाम देशों को यूएवी बेचती है।

इनके अलावा उक्रेन की उक्रोबोरोनप्रोम डिफेंस कम्पनी ने भारत की सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी भारत इलेक्ट्रानिक लि. (बेल) के साथ एमओयू किया। दोनों मिलकर आर्मर्ड व्हेकिल्स के लिए आधुनिक कम्पोनेंट्स, आधुनिक रडार और एयर डिफेंस सिस्टम का विकास और उत्पादन करेंगे। दोनों कंपनियां नौसेना के लिए सोनार सिस्टम और रडार डिवाइसेज पर अभियांत्रिकी संबंधित साझा शोध करेंगी। फ्रेंच कंपनी थेल्स ने भारतीय कम्पनी एमकेयू के साथ दो एमओयू किये। दोनों मिलकर यहां आप्ट्रानिक गजेट्स और एफ-90 (सीक्यूबी) राइफल्स का भारतीय जरूरतों के मुताबिक विकास और निर्माण करेंगे।

एमकेयू के कानपुर स्थित वर्कशाप में मेक इन इंडिया के तहत इन हथियारों का निर्माण तो होगा ही, ये भारत में ही नया प्रिमिसेज भी सेटअप करेंगे। दरअसल सैन्य हथियार खरीद मामले में भारत सबसे बड़ा देश है, लेकिन अब सरकार चाहती है कि हम खुद एक डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप मे उभरें। सरकार अपने घरेलू डिफेंस कंपनियों को प्रमोट करना चाहती है, ताकि विदेशी हथियारों की खरीद को कम किया जा सके। हाल ही में दक्षिण एशिया, अफ्रीका और आसियान देशों में भारतीय हथियारों की मांग भी बढ़ी है। उम्मीद की जा सकती है कि इस डिफेंस एक्सपो में हुए विभिन्न देशी-विदेशी कम्पनियों में दर्जन भर से अधिक समझौतों के बाद भारत के रक्षा उत्पादन क्षेत्र में एक लहर उत्पन्न होगी।