उम्र कैद लाजिमी थी

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पत्रकार जे डे हत्या मामले में छोटा राजन को उम्र कैद हो गई है। सत्तर से अधिक संगीन जुर्म में आरोपित छोटा राजन को मिली यह पहली सबसे बड़ी सजा है। अन्य मामलों की सुनवाई अभी चल रही है। इस आधार पर यह अनुमान किया जा सकता है कि मुंबई का डॉन होने के मंसूबा रखने वाले इस अपराधी को जेल से बाहर आना मुश्किल है।

राजन के साथ उसके आठ दोस्त भी उम्र कैद हुई है। मिड-डे के पत्रकार जे डे की हत्या सुपारी लेकर 11 जून 2011 में कर दी गई थी। उस वक्त राजन अपने प्रतिस्पर्धी दाउद इब्राहिम के मुंबई छोड़ देने के बाद एकमात्र ताकतवर डॉन रह गया था। किसी की हत्या करना या करा देना उसके लिए मामूली बात थी। जे डे की हत्या उसने कराई थी।

अपनी दोस्त महिला पत्रकार के कहने पर। दरअसल, यह मामला पेशेवर ईष्र्या का है, जिसमें एक महिला पत्रकार जिगना वोरा ने जे डे के चातुर्य और बढ़ते कद से असुरक्षित महसूस कर रही थी। हालांकि अदालत ने मजबूत साक्ष्य न होने के चलते वोरा को रिहा कर दिया, लेकिन उकसावे की दोषी तो वही थी। वह राजन के इंडोनेशिया प्रवास के दौरान भी बातचीत के जरिये सम्पर्क में थी। इसके साक्ष्य थे।

आखिर एक पत्रकार की भागे हुए कुख्यात मुजरिम से क्या बात होती रही होगी? ऐसे समय में जब पत्रकार मामूली से लेकर अंडर्वल्ड के सरगनाओं तक खूनी निशाने पर हैं, खुद अपनी बिरादरी की महज ईष्र्या के चलते हत्या कर दिये जाने का यह सर्वथा भिन्न मामला है। जिगना की जलन इस बात से थी कि जे डे क्राइम बीट के उससे ज्यादा विसनीय और सफल पत्रकार हैं।

डे अपने कामों से ख्यातिप्राप्त और सम्मानित हैं। उनके जीवित रहते जिगना उनकी बराबरी नहीं कर सकती थी। अत: डे को सदा के लिए हटा दिया जाना ही एकमात्र निदान है। नीति कहती है और अनुभव भी कि डाह डाही का सूडाह करता है। पर इसमें जे डे ही मार डाले गए। इसलिए कि वह दूसरों से काफी अच्छे थे।

हालांकि यह कारण भी था कि जे डे की रपटों से राजन को समेत अंडर्वल्ड के सरगनाओं को बेचैनी होती थी, जिगना के उकसावे ने इसको लहकाया। यह अफसोस है कि जिगना के विरुद्ध तगड़े साक्ष्य नहीं जुटाये जा सके। फिर भी राजन को सजा मिलने से उन अपराधी समुदाय में एक कड़ा संदेश जाएगा कि पत्रकारों की हत्या कर न तो उनकी आवाज दबाई जा सकेगी और न ही वे छुट्टा घूमते रह सकेंगे।