उन्नाव बलात्कार काण्ड : सेंगर सात दिनों की सीबीआई रिमाण्ड पर

सहारा न्यूज ब्यूरो, लखनऊ

उन्नाव के बहुचर्चित बलात्कार काण्ड के मुख्य आरोपित भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को शनिवार अपराह्न चार बजे सीबीआई ने अदालत में पेश किया। सीबीआई अदालत ने भाजपा विधायक को सात दिनों की रिमाण्ड पर जांच एजेंसी को सौंप दिया। इससे पूर्व शनिवार तड़के सीबीआई ने सेंगर का मेडिकल कराया। इसके बाद पीड़िता व उसके परिवार के लोगों का सेंगर से आमना-सामना कराया गया। सूत्रों के मुताबिक इस दौरान सेंगर पीड़िता तथा उसके परिजनों के सवालों का जवाब नहीं दे सके और कई बार हाथ जोड़कर माफ करने की विनती करते रहे।

सीबीआई ने शुक्रवार रात साढ़े नौ बजे सेंगर को लिखा-पढ़ी में गिरफ्तार करना दिखाया है। हालांकि, उन्हें शुक्रवार तड़के इन्दिरानगर स्थित एक परिचित के आवास से पकड़कर पूछताछ के लिए सीबीआई कार्यालय लाया गया था। सीबीआई कार्यालय में उनसे लम्बी पूछताछ हुई। इस दौरान बलात्कार के आरोप की तस्दीक होने के बाद सीबीआई ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। शनिवार चार बजे उन्हें कड़ी सुरक्षा के बीच सीबीआई ने मजिस्ट्रेट सुनील सिंह की अदालत में पेश किया। इस दौरान सीबीआई ने अदालत से सेंगर को चौदह दिनों की रिमाण्ड पर दिये जाने की अर्जी दाखिल की।

मुझे भगवान पर भरोसा : उन्नाव बलात्कार काण्ड में गिरफ्तार भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर ने खुद को फिर निर्दोष बताया है। उनका कहना है कि मुझे राजनीतिक साजिश के तहत फंसाया गया है। मुझे भगवान पर भरोसा है।

पीड़िता को विधायक तक पहुंचाने वाली महिला गिरफ्तार : भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की मददगार महिला शशि सिंह को भी सीबीआई ने गिरफ्तार किया है। उससे पूछताछ की जा रही है। शशि नौकरी दिलाने के नाम पर  पीड़िता को भाजपा विधायक के पास ले गयी थी। शशि विधायक की मददगार बतायी जा रही है। विधायक तथा उसके भाई पर बलात्कार के आरोप लगने के बाद शशि अपने फौजी पति तथा बेटे के साथ उन्नाव से लखनऊ पहुंची थी।
लखनऊ में उसने पत्रकार वार्ता कर बताया था कि जो युवती विधायक पर बलात्कार का आरोप लगा रही है, वही उसके बेटे शुभम पर बलात्कार का आरोप लगाकर उसे जेल भिजवा चुकी है।

शशि को सीबीआई ने उन्नाव से पकड़ा है। इसके बाद उसे लखनऊ लाया गया। उसकी गिरफ्तारी के बाद आशंका व्यक्त की जा रही है कि मामले में विधायक के अन्य मददगारों पर भी सीबीआई कार्रवाई कर सकती है। इन मददगारों में माखी व सफीपुर थाने के पुलिसकर्मी तथा वे लोग भी शामिल हैं, जिन्होंने फर्जी तरीके से पीड़िता के पिता तथा भाई पर मामले दर्ज कराये थे।