ईवीएम से ही चुनाव

,

यह अच्छा हुआ कि चुनाव आयोग ने सर्वदलीय बैठक में मतपत्रों से चुनाव कराने की मांग खारिज कर दिया। इसके बाद ईवीएम बनाम मतपत्र पर बहस बंद हो जानी चाहिए। चुनाव आयोग ने यह बैठक पिछले कुछ समय से चुनाव को लेकर उठे सारे सवालों पर राजनीतिक दलों से विचार-विमर्श के लिए बुलाया था।

जाहिर है, उसमें सारे मुद्दे उठे। एक साथ चुनाव और चुनावी खर्च से लेकर चुनाव प्रणाली में बदलाव तक पर। किंतु सबसे बड़ा मुद्दा ईवीएम ही था। कांग्रेस सहित कई पार्टयिों ने ईवीएम को हटाकर उसकी जगह मतपत्रों से चुनाव कराने की मांग रखी। आयोग ने स्पष्ट कहा कि ईवीएम अभी तक शत-प्रतिशत सुरक्षित निकला है। वैसे भी राजनीतिक दलों की मांग पर आयोग ने शत-प्रतिशत वीवीपैट की व्यवस्था कर दी है।

ईवीएम में डाले गए मतों का कुछ जगहों पर वीवीपैट से मिलान भी किया गया और यह पूरी तरह समान निकला। ऐसे में आयोग से यही रुख अपनाने की उम्मीद भी थी। यह बात स्पष्ट हो चुकी है कि राजनीतिक दलों का ईवीएम पर प्रश्न उठाना ठोस तथ्यों और तकरे पर आधारित नहीं रहा है। जब भी चुनाव मे बुरी तरह हारे ईवीएम से छेड़छाड़ का आरोप लगा दिया, जब जीत गए तो चुप।

ईवीएम पर प्रश्न उठाया प्रकारांतर से चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर प्रश्न उठाना है। राजनीतिक दलों ने तो आपसी लड़ाई में पिछले मुख्य चुनाव आयुक्त तक को घसीट दिया। इस समय राजनीतिक दलों में एक-एक बिंदु पर जितने मतभेद हैं, उन सबका संज्ञान लिया जाए तो फिर चुनाव संपन्न करना ही असंभव हो जाएगा। ईवीएम को हैक करने, उसमें छेड़छाड़ करने के दावों को साबित करने के लिए आयोग ने दो बार चुनौती दी।

आयोग के नियत समय पर कोई साबित करने नहीं पहुंचा। ईवीएम एक राजनीतिक मसला है तो इससे आयोग को अप्रभावित रहना स्वाभाविक है। उसे यह देखना था कि ईवीएम प्रणाली पूरी तरह सुरक्षित और विश्वसनीय है या नहीं। बावजूद इसके आयोग ने कहा कि राजनीतिक दलों ने जो भी सुझाव दिए हैं या मांग रखें हैं, उन पर विचार कर वह सबको संतुष्ट करने का पूरा प्रयास करेगा।

हमारा मानना है कि वीवीपैट एवं ईवीएम जितना व्यावहारिक है, उसे आयोग को स्वीकारना चाहिए। जो व्यावहारिक नहीं हैं, उन पर विचार करना समय जाया करना होगा। राजनीतिक दलों से भी आग्रह है कि वह इस विवाद को खत्म करें और चुनाव आयोग की ईमानदारी पर विश्वास बनाए रखें।