आशा भोसले और शर्मिला टैगोर ने अपने समय को किया याद कहा...

भाषा , कोलकाता

फिल्म अभिनेत्री शर्मिला टैगोर और सुप्रसिद्ध पाश्र्वगायिका आशा भोसले ने कल शाम यहां एक कार्यक्रम में अपने-अपने समय को याद किया. आशा भोसले ने बंगाली महिलाओं को बेहद सुंदर बताया और कहा कि शर्मिला टैगोर इसका बेहतरीन उदाहरण हैं जो ‘सुंदरता और सौम्यता’ का प्रतीक हैं। 

इल्म नहीं था कि गीत के साथ होंठ हिलाने होंगे : शर्मिला  

फिल्म अभिनेत्री शर्मिला टैगोर ने उस समय को याद किया कि जब उन पर उनकी पहली हिन्दी फिल्म के लिए गीत फिल्माया जा रहा था और उन्हें इल्म नहीं था कि गीत के साथ साथ उन्हें होंठ हिलाने होंगे।      

शर्मिला ने कहा कि जब वह अपनी पहली हिन्दी फिल्म ‘कश्मीर की कली’ के गीत ‘दीवाना हुआ बादल’ की कश्मीर में डल झील में शूटिंग कर रही थीं तब उन्हें इल्म नहीं था कि गीत साथ ही उन्हें भी होंठ हिलाने होंगे।      

शर्मिला ने अपने फिल्मी सफर की शुरूआत 1959 में सत्यजीत रे की बांग्ला फिल्म ‘अपूर संसार’ से की थी।

हिन्दी फिल्म जगत में उन्होंने 1964 में ‘कश्मीर की कली’ के साथ कदम रखा था।      

उन्होंने 84 वर्षीय आशा भोसले को एक कार्यक्रम में पी सी चंद्रा लाइफटाइम एचीवमेंट पुरस्कार प्रदान करते हुए कहा कि इस फिल्म की पाश्र्व गायिका आशाजी थीं और संगीतकार ओ पी नैयर साहब थे। दोनों उस वक्त की हिन्दी फिल्म जगत के बड़े नाम थे, जबकि वह स्वयं नयी थीं। हालांकि उन्होंने बांग्ला फिल्मों में काम किया था जिसमें सत्यजीत रे की फिल्म भी शामिल थी। 

आशा भोसले ने बंगालियों की संगीत समझ को सराहा

सुप्रसिद्ध पाश्र्वगायिका आशा भोसले ने  बंगालियों की संगीत समझ की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने (बंगालियों ने) किसी भी संगीत समरोह में उन पर लोकप्रिय हिन्दी फिल्मी गीत गाने का दबाव नहीं डाला और इसे उनकी (आशा की) पसंद पर छोड़ दिया।      

आशा ने यहां पिता दीनानाथ मंगेशकर द्वारा संगीतबद्ध किया गया एक मराठी गीत सुनाया। फिर उन्होंने कहा कि दूसरे स्थानों की तरह यहां उनसे उनके गाये लोकप्रिय हिन्दी पाश्र्वगीतों को सुनाने का अनुरोध नहीं किया गया। ‘‘मैं इस संगीत समझ की सराहना करती हूं।’’      

उन्होंने जो गीत सुनाया उसके बारे में कहा कि यह गीत शास्त्रीय संगीत पर आधारित है। उनके पिता ने अलहदा तरह से इस गीत को संगीत में पिरोया था।      

हिन्दी के अलावा 20 भारतीय और विदेशी भाषाओं में गीत गाने वाली गायिका ने अपने 75 साल के पाश्र्वगायन के अनुभव को याद किया। आशा भोसले इस वक्त 84 वर्ष की हैं।      

‘सावन आया’ गीत से 1948 में अपने सफर की शुरूआत करने वाली आशा ने कहा , ‘मैंने अब तक हजारों फिल्मों में गीत गाये हैं। लेकिन मैं महसूस करती हूं कि जो मेरे पिता ने सिखाया और फिल्मों में जैसे गीत गा रही हूं , वह एकदम अलग है।’     

उस्ताद अली अकबर खान के साथ ग्रैमी पुरस्कार के नामांकित होने वाली पहली भारतीय गायिका ने कहा , ‘मैंने कई बांग्ला गीत गाये और रंिबद्र संगीत को भी स्वर दिया। पर अफसोस है कि मैं बांग्ला भूल गयी हूं।’      

पहला बांग्ला गीत 1958 में गाने वाली आशा ने कहा , ‘मेरा कोलकाता से पहला परिचय बचपन में शरत बाबू का उपन्यास का पढते वक्त हुआ। .. मैं व्यक्तिगत रूप से आपकी संस्कृति को जानने के लिए उत्सुक थी। इसका अवसर मुझे 1952 में पहले कोलकाता दौरे पर मिला।’’